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Himcare: हिमाचल के निजी अस्पतालों की लंबित हिमकेयर राशि के भुगतान पर रोक, जानिए वजह

Fri, 08 May 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 08 May 2026 05:00 AM IST
सार

निजी अस्पतालों की लंबित हिमकेयर राशि के भुगतान पर रोक दिया गया है। हिमकेयर योजना से जुड़े कथित घोटाले की विजिलेंस जांच के चलते यह राशि फिलहाल रोकी गई है। 

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Himcare: Payment of Pending Himcare Dues to Himachal's Private Hospitals Halted: Find Out the Reason
हिमकेयर कार्ड(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में निजी अस्पतालों की लंबित हिमकेयर राशि के भुगतान पर रोक दिया गया है। हिमकेयर योजना से जुड़े कथित घोटाले की विजिलेंस जांच के चलते यह राशि फिलहाल रोकी गई है। जांच पूरी होने तक किसी भी निजी अस्पताल को भुगतान जारी न किया जाएगा। प्रदेश सरकार के पास निजी अस्पतालों की 200 करोड़ रुपये से अधिक की राशि लंबित पड़ी हुई है। प्रदेशभर के कई निजी अस्पताल लंबे समय से हिमकेयर के तहत उपचार किए गए मरीजों के बिलों के भुगतान की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब विजिलेंस जांच के कारण इस प्रक्रिया पर पूरी तरह रोक लग गई है।

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विजिलेंस विभाग कर रहा जांच
सूत्रों के अनुसार विजिलेंस विभाग हिमकेयर योजना में फर्जी बिलिंग, उपचार संबंधी रिकॉर्ड में गड़बड़ी और भुगतान प्रक्रिया में अनियमितताओं की जांच कर रहा है। हाल ही में विजिलेंस ने योजना से जुड़ी स्वास्थ्य एजेंसी और ऑडिट एजेंसी के कर्मचारियों से भी पूछताछ की थी। जांच एजेंसियां अस्पतालों की ओर से लगाए गए दावों और सरकार को भेजे गए मेडिकल बिलों का मिलान कर रही हैं। सरकार का मानना है कि जांच पूरी होने से पहले भुगतान जारी करने से वित्तीय अनियमितताओं की आशंका बढ़ सकती है। इसी वजह से स्वास्थ्य विभाग ने सभी लंबित भुगतान अस्थायी रूप से रोक दिए हैं। बताया जा रहा है कि विजिलेंस की रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि किन अस्पतालों के दावे सही पाए गए हैं और किन मामलों में कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकार पारदर्शिता के साथ जांच पूरी करवाना चाहती है और विजिलेंस की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही भुगतान को लेकर अगला निर्णय लिया जाएगा।

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ऑडिट एजेंसियों के कर्मियों से हुई दूसरे दौर की पूछताछ
 प्रदेश के बहुचर्चित 110 करोड़ रुपये से अधिक के हिमकेयर घोटाले की जांच जल्द निर्णायक मोड़ तक पहुंच सकती है। मामले में विजिलेंस ने बुधवार को ऑडिट और स्वास्थ्य एजेंसियों से जुड़े छह कर्मचारियों से दूसरे दौर की गहन पूछताछ की। कई घंटों तक चली पूछताछ के दौरान जांच एजेंसी को कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं, जो पूरे मामले में बड़े स्तर पर अनियमितताओं और सुनियोजित साजिश की ओर संकेत कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार पूछताछ के दौरान रिकॉर्ड के रखरखाव, मेडिकल बिलों के सत्यापन और भुगतान प्रक्रिया से जुड़े कई बिंदुओं पर कर्मचारियों से तीखे सवाल किए गए। संदिग्ध मेडिकल बिलों और भुगतान फाइलों को लेकर पूछे गए सवालों पर कई कर्मचारी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।

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विजिलेंस को प्रारंभिक जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि सॉफ्टवेयर डाटा और फिजिकल रिकॉर्ड में कथित तौर पर हेरफेर किया गया, ताकि कुछ अस्पतालों के दावों को नियमों के अनुरूप दर्शाया जा सके। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ निजी अस्पतालों के बिलों को बिना विस्तृत जांच के प्राथमिकता के आधार पर मंजूरी दी जाती थी। विजिलेंस अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि कहीं एजेंसी कर्मियों और निजी अस्पतालों के बीच मिलीभगत कर फर्जी या बढ़े-चढ़े दावों को पास तो नहीं कराया गया। जांच एजेंसी डिजिटल रिकॉर्ड, भुगतान ट्रेल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी खंगाल रही है। माना जा रहा है कि कई स्तरों पर कमीशन और वित्तीय लेनदेन से जुड़े तथ्यों की भी जांच की जा रही है। विजिलेंस अब संबंधित अधिकारियों, एजेंसियों और अस्पताल प्रबंधन से जुड़े अन्य लोगों को भी पूछताछ के दायरे में ला सकती है।

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