पाकिस्तान ले रहा भारत की हिमाचली मटर के चटकारे
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भले ही भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में इन दिनों कोई खासा सुधार नहीं आया हो, लेकिन हिमाचली मटर पड़ोसी देश की रसोई में खूब महक रहा है। बाघा बॉर्डर पर हिमाचली खासकर मंडी जिले की सराज घाटी के मटर की खूब डिमांड है। आढ़ती इसे हाथोंहाथ ले रहे हैं। दाम भी चोखे मिल रहे हैं, प्रतिकिलो 50 से 60 रुपये तक।
प्रदेश के मंडी, कुल्लू और शिमला जिलों के बेमौसमी हरे मटर की 200 गाड़ियां रोजाना बाघा बार्डर के लिए रवाना हो रही हैं। यहां से मटर पलटी कर पाकिस्तान पहुंच रहा है। यही नहीं, हिमाचल का मटर दिल्ली, पंजाब के लुधियाना, बठिंडा, अमृतसर और होशियारपुर की मंडियों में पहुंच रहा है। हालांकि, इस वर्ष मौसम खराब होने के चलते फसल थोड़ी कम हुई है, लेकिन अच्छे दाम मिलने से किसान गद्गद हैं।
सराज के मटर व्यापारी कुशाल ठाकुर, नेत्र सिंह, गुरदेव और हंसराज ने बताया कि बाघा बार्डर पर पाकिस्तान के आढ़तियों से उन्हें पता चला कि पड़ोसी देश में हिमाचल के नाम का सिक्का चलता है। कृषि विभाग के पूर्व अतिरिक्त निदेशक डा. एचआर शर्मा ने कहा कि हिमाचल में सालाना साढ़े 14 लाख मीट्रिक टन सब्जियों का उत्पादन होता है। इसमें से 85 फीसदी सब्जियां हिमाचल से बाहर जाती हैं। विदेशों में भी हिमाचली सब्जियों की खूब डिमांड रहती हैं।
साल में 3 फसलें लेते हैं किसान
हिमाचल के कई जिलों में वर्ष भर मटर की खेती होती है। किसान मौसमी-बेमौसमी मटर उगाते हैं। कुछ किसान साल में मटर की 3 से 4 फसलें लेते हैं। मौसम साथ दे तो एक किसान लाखों कमाता है। हालांकि, मटर की खेती का दायरा बहुत कम हैं। मंडी का बल्ह क्षेत्र तो सब्जी उत्पादन में मिनी पंजाब के नाम से मशहूर है।
मोदी ने कहा था, गुच्छी का पेटेंट कराएंगे- हिमाचल के मंडी, कुल्लू, शिमला, लाहौल, किन्नौर और कांगड़ा के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से उगने वाली गुच्छी की विदेशों और बाहरी राज्यों के पांच सितारा होटलों में खूब डिमांड रहती है। ये सब्जी मेन्यू में सबसे ऊपर रहती है। गुच्छी 15000 किलो प्रति किलो के हिसाब से बिकती है।
लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी ने हिमाचल की गुच्छी को पेटेंट कराने की बात कही थी। माना जाता है गुच्छी कई बीमारियों के लिए रामबाण तो है ही सेक्स पावर भी बढ़ाती है।