फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   himachali folk singer Rafiq Muhammad gave new tune to himachal folk

लोक कलाकार: रफीक मुहम्मद ने हिमाचली लोक संगीत को दी नई धुन

Mon, 11 Mar 2019 12:23 PM IST
ashok chauhan राकेश भारद्वाज, अमर उजाला, धर्मशाला
राकेश भारद्वाज, अमर उजाला, धर्मशाला Published by: ashok chauhan Updated Mon, 11 Mar 2019 12:23 PM IST
विज्ञापन
himachali folk singer Rafiq Muhammad gave new tune to himachal folk

रफीक मुहम्मद की शहनाई की धुनों में हिमाचली लोक गीतों को सुनकर हर कोई मंत्रमुग्ध होता है। अपनी इस कला के बूते रफीक मुहम्मद 1987 में तत्कालीन राष्ट्रपति आर वेंकटरमन के हाथों सम्मान भी ले चुके हैं। पत्नी, दो बेटे और तीन बेटियों का परिवार पालने के लिए शहनाई से गुजारा नहीं चल सकता था, इसलिए उन्होंने बाल काटने का काम भी शुरू किया।

विज्ञापन


पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी, कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह, शांता कुमार और प्रेम कुमार धूमल सहित कई बड़े नेताओं के कार्यक्रम में रफीक शहनाई वादन कर चुके हैं। इतना ही नहीं, कांगड़ा और चंबा सहित अन्य जिलों में अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय कार्यक्रम भी उनकी शहनाई की धुनों के बगैर शुरू नहीं होते हैं।
विज्ञापन


यूं तो शहनाई की धुनों में शास्त्रीय संगीत के राग बजाने में रफीक को महारथ हासिल है, लेकिन हिमाचली लोक गीतों को शहनाई की धुनों में उतारने में भी रफीक पीछे नहीं हैं। हिमाचल का कोई भी लोक गीत हो, रफीक शहनाई की धुनों में उतार देते हैं। शहनाई के साथ लोक वाद्य यंत्र ढोल और नगाड़ा बजाने में भी माहिर हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

बाहरी राज्यों में भी बजा चुके हैं शहनाई 

रफीक मुहम्मद ने बताया कि 80 के दशक में दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में एक कार्यक्रम में उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति आर वेंकटरमन और शहनाई वादक उस्ताद बिसमिल्लाह खां के सामने प्रस्तुति देने का मौका मिला था।

पूर्व राष्ट्रपति वेंकटरमन और उस्ताद बिसमिल्ला खां से मिली प्रशंसा ने उन्हें आगे बढ़ने का मौका दिया। रफीक मुहम्मद हिमाचल के बाहर दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और लुधियाना सहित अन्य राज्यों में भी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शहनाई की धुनों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर चुके हैं।

झुंझु अली से सीखी शहनाई की कला
साल 1935 में धर्मशाला के खनियारा में जन्में रफीक मुहम्मद अपने जीवन के 80 बसंत देख चुके हैं। शहनाई वादन उनका पारिवारिक पेशा रहा है। शहनाई वादक झुंझु अली से उन्होंने इसकी शिक्षा हासिल की। लोक वाद्य यंत्र बजाने की कला को वह अपने तक सिमित नहीं रखना चाहते। इसलिए उन्होंने अपने बेटे मुनीर रियाजी और इम्तियाजी को भी नगाड़ा और ढोलक बजाना सिखाया है। उनका पोता इमरान भी ढोलक बजाना शुरू हो गया है। 
--

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed