जानना जरूरी हैं वीरभद्र सरकार के बजट की ये बातें
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बजट में आंकड़ों की बाजीगरी दिखाकर भले ही हिमाचल सरकार ने आने वाले समय में खुद को मुनाफे में दिखा दिया हो लेकिन दिलचस्प यह है कि सरकार लोन का ब्याज चुकाने में ही करीब तीन हजार करोड़ रुपये खर्च कर देगी।
अगले तीन साल में यह आंकड़ा चार हजार करोड़ तक पहुंच जाएगा। बजट के अनुसार 2015-16 में 2950 करोड़, 2016-17 में 3229.95 करोड़, 2017-18 में 3526.46 करोड़ और 2018-19 में 3878.40 करोड़ रुपये ब्याज के चुकाए जाएंगे।
हिमाचल के बजट में सुनहरे भविष्य के खूब सपने दिखाए गए हैं। बजट के अनुसार अगले वित्त वर्ष से राजस्व घाटा पूरी तरह खत्म हो जाएगा। राज्य सरकार मुनाफे में नजर आने लगेगी। तीन साल बाद तो हिमाचल ऊंची उड़ान में दिखेगा। सरकार को आर्थिक मोर्चो पर जूझने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इसलिए की गई आंकड़ों की बाजीगरी
आंकड़ों की यह बाजीगरी सिर्फ 14वें वित्त आयोग से अगले पांच साल तक धन लेने के लिए है, जिससे आयोग की शर्तों का उल्लंघन न हो। मुख्यमंत्री की ओर से विधानसभा में पेश किए गए बजट के अनुसार 31 मार्च 2015 तक सरकार डेढ़ हजार करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व घाटे में है।
बजट के आंकड़ों के अनुसार अगले साल 31 मार्च 2016 तक घाटा खत्म हो जाएगा। प्रदेश सरकार .20 फीसदी सरप्लस में नजर आएगी। इसके बाद से लेकर 2018-19 तक सरकार घाटे के बजाय सरप्लस में ही नजर आएगी। किसी भी सरकार सरकार को कमाई से अधिक खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
जानकारों का कहना है कि आंकड़ों में यह बाजीगरी सिर्फ इसलिए की गई ताकि अगले पांच साल तक 14वें वित्त आयोग की ओर से स्वीकृत पूरा पैसा मिलता रहा। क्योंकि, राजस्व घाटा कम न करने की स्थिति में आयोग की ओर से धन पर रोक लगाई जा सकती है।
ऐसे मुनाफे में दिखेगा हिमाचल
2014-15====18906.96=======20445.03
2015-16====23534.53=======23487.69
2016-17====26807.87=======26735.55
2017-18====29815.51========29771.61
2018-19====33031.64========32961.15
(राजस्व आय और व्यय करोड़ रुपये में)
नई आवास योजना शुरू
प्रदेश सरकार ने ‘लैंड ऑनर बीकम पार्टनर डेवलपमेंट विद हिमुडा’ नई आवास स्कीम लांच की है। इस योजना में ऋण और अन्य विवादों से मुक्त भू मालिक हाउसिंग इस्टेट विकसित करने के लिए हिमुडा के साथ पार्टनर बन सकेंगे।
पूर्व सैनिकों को होगा फायदा
बजट में पूर्व वर्ल्ड वार सैनिकों की वित्तीय सहायता में बढ़ोतरी की है। पहले पूर्व सैनिकों को 2000 रुपये वित्तीय सहायता मिलती थी लेकिन अब इसे 3000 करने का फैसला लिया गया है।