Himachal Weather: हिमाचल में 48 सड़कें बाधित, 55 बिजली ट्रांसफार्मर और 42 पेयजल योजनाएं भी ठप
सोमवार शाम तक प्रदेश में 48 सड़कों पर वाहनों की आवाजाही ठप रही। मनाली-ग्रांफू-काजा मार्ग में फंसे 105 लोग 14 घंटे बाद सुरक्षित बचाकर कोकसर पहुंचा दिया गए हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हिमाचल प्रदेश में सोमवार को मानसून कमजोर रहा। राजधानी शिमला और कांगड़ा में हल्की बूंदाबांदी हुई। प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में मौसम साफ रहा। रविवार रात को बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा और शिमला जिला में बादल झमाझम बरसे। मनाली-ग्रांफू-काजा मार्ग में फंसे 105 लोग 14 घंटे बाद सुरक्षित बचाकर कोकसर पहुंचा दिया गए हैं। सोमवार शाम तक प्रदेश में 48 सड़कों पर वाहनों की आवाजाही ठप रही। 55 बिजली ट्रांसफार्मर और 42 पेयजल योजनाएं भी बंद रहीं। सोमवार को प्रदेश में 13 कच्चे मकान और चार गोशालाएं क्षतिग्रस्त हुईं। प्रदेश के कई क्षेत्रों में मंगलवार को बारिश का येलो अलर्ट जारी हुआ है। सोमवार शाम तक कुल्लू जिले में 31, मंडी में सात, सोलन में छह, लाहौल-स्पीति में दो और कांगड़ा-चंबा में एक-एक सड़क पर वाहनों की आवाजाही नहीं हुई। कुल्लू जिले में भारी बारिश से 40, चंबा में 10 और मंडी में पांच बिजली ट्रांसफार्मर बंद रहे।
चंबा जिले में 31 और लाहौल-स्पीति में 11 पेयजल योजनाएं प्रभावित रहीं। प्रदेश में जारी बारिश से मानसून सीजन के दौरान अभी तक 53,869 लाख रुपये की संपत्ति का नुकसान हो चुका है। उधर, मनाली-ग्रांफू-काजा मार्ग के डोहरनी मोड़ और छतडू के बीच फंसे 105 लोगों को 14 घंटे बाद सुरक्षित बचाकर कोकसर पहुंचाया गया। प्रशासन, पुलिस और बीआरओ के संयुक्त अभियान से सभी लोगों को करीब 16 किलोमीटर दूर से बचाया गया। दोनों तरफ के नालों में बाढ़ आने से डोहरनी मोड़ और छतडू के बीच निगम की एक बस के साथ 22 अन्य वाहन फंस गए थे। इन लोगों को रविवार आधी रात करीब 2:00 बजे तक करीब 14 घंटे तक भूखे प्यासे रहना पड़ा। घने अंधेरे में करीब छह घंटे तक चले बचाव अभियान के बाद इन लोगों को देर रात को सुरक्षित कोकसर पहुंचाया गया। फंसे यात्रियों में 36 सैलानी और 69 स्थानीय यात्री थे।
मलाणा गांव के पास दरका पहाड़, चट्टानें-पत्थर गिरे
जिला कुल्लू में भारी बारिश के बाद अब पहाड़ दरकने लगे हैं। ताजा मामला पार्वती घाटी के मलाणा गांव के आसपास का है, जहां एक पहाड़ तेजी से दरक गई। पहाड़ से चट्टानें व पत्थर निर्माणाधीन सड़क पर गिरे। हादसे में किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ है। घटना सोमवार सुबह की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार मलाणा गांव के लिए निकल रही सड़क के पास यह पहाड़ दरका है। हालांकि इन दिनों सड़क निर्माण का कार्य बंद है, लेकिन हादसे के कुछ दूरी पर एक मशीन भी खड़ी नजर आ रही है। सोशल मीडिया में पहाड़ गिरने का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। स्थानीय मलाणा पंचायत के प्रधान राजू राम ने कहा कि पहाड़ उनके गांव को निकल रही सड़क पर गिरा है। इसमें किसी तरह के जानमाल का नुकसान नहीं हुआ है। बता दें कि इसे पहले मणिकर्ण घाटी के कसोल के पीछे का एक पहाड़ गिर गया था, जिसमें वन संपदा को भारी नुकसान हुआ था। इसके बाद गड़सा घाटी के नजां नाले के पास पहाड़ी दरकने से एक बोलेरो गाड़ी क्षतिग्रस्त और चालक घायल हो गया था। उपायुक्त कुल्लू आशुतोष गर्ग ने कहा कि बारिश के कारण भूस्खलन और पहाड़ों के दरका की घटनाएं हो रही हैं। ऐसे में सैलानी व आम लोग नदी नालों के साथ संवेदनशील मार्गों, पुलों से बेवजह आवाजाही करने से दूर रहें।
कहां कितना तापमान (डिग्री सेल्सियस में)
क्षेत्र अधिकतम न्यूनतम
ऊना 32.8 21.0
बिलासपुर 31.0 22.0
हमीरपुर 30.6 22.1
कांगड़ा 29.9 21.2
चंबा 27.8 20.0
धर्मशाला 26.8 16.0
सोलन 26.5 19.8
नाहन 26.3 22.1
शिमला 21.6 16.2
कल्पा 19.6 11.8
केलांग 15.3 9.1
क्षेत्र बारिश (मिलीमीटर में)
गोहर 93
नयनादेवी 79
भौरंज 72
धर्मशाला 70
कुफरी 68
पालमपुर 65
कांगड़ा 48
बिलासपुर 36
सोलन 27
ऊना 20
शिमला 19
शानन परियोजना में 20 और बस्सी में 17 घंटे ठप रहा विद्युत उत्पादन, डेढ़ करोड़ का नुकसान
भारी बरसात का असर पंजाब की हिमाचल के जोगिंद्रनगर स्थित शानन और बस्सी विद्युत परियोजनाओं पर भी पड़ा है। भारी गाद आने से रविवार को 110 मेगावाट की शानन परियोजना में करीब 20 घंटे और 66 मेगावाट की बस्सी परियोजना में 17 घंटे तक विद्युत उत्पादन ठप रहा। दोनों परियोजना प्रबंधन को करीब डेढ़ करोड़ का नुकसान हुआ है। अब उत्पादन सुचारु कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि बरोट स्थित परियोजना की रेजर वायर में गाद भरने से दोनों परियोजनाओं में विद्युत उत्पादन रोकना पड़ा। 11.2 मिलियन क्यूसिक क्षमता वाली शानन परियोजना की रेजर वायर में करीब 40 हजार क्यूसिक मीटर अतिरिक्त पानी भरने से शानन परियोजना प्रबंधन को सभी आठ गेट खोलने पड़े।
रेजर वायर के इनटैक गेट को समय रहते बंद करने से दोनों परियोजनाओं की मशीनरी को नुकसान नहीं पहुंचा है। विद्युत उत्पादन ठप होने से शानन परियोजना को करीब एक करोड़ और बस्सी परियोजना को 50 लाख का नुकसान हुआ है। रविवार सुबह करीब 9:00 बजे बरोट स्थित रेजरवायर में गाद भरने से दोपहर 12:00 बजे शानन में विद्युत उत्पादन रोकना पड़ा। करीब 20 घंटे बाद सोमवार सुबह 8:00 बजे शानन परियोजना में विद्युत उत्पादन शुरू हुआ। बस्सी परियोजना में रविवार दोपहर 3: 25 मिनट पर अचानक विद्युत उत्पादन ठप हो गया। इसे सोमवार सुबह 8: 40 मिनट पर दोबारा शुरू किया गया।
पंजाब की शानन विद्युत परियोजना की बरोट स्थित रेजर वायर में गाद भरने से विद्युत उत्पादन रोकना पड़ा। अनुमानित एक करोड़ का नुकसान शानन परियोजना को पहुंचा है। समय पर रेजरवायर के इनटैक गेट बंद कर देने से पावर हाउस की मशीनरी को कोई भी नुकसान नहीं हुआ है।
- नरेंद्र सिंह, आरई, शानन परियोजना
हिमाचल की 66 मेगावाट बस्सी परियोजना में 17 घंटे विद्युत उत्पादन बंद होने से करीब 50 लाख रुपये का नुकसान परियोजना प्रबंधन को उठाना पड़ा है। शानन परियोजना में अचानक विद्युत उत्पादन बंद होने से बस्सी परियोजना भी प्रभावित हुई।
- अरुण धीमान, आरई बस्सी परियोजना