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मौसम हिमाचल: किन्नौर में गाड़ी पर गिरीं चट्टानें, मणिकर्ण में आई बाढ़, प्रदेश में दो दिन भारी बारिश का अलर्ट

Mon, 02 Aug 2021 09:03 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Mon, 02 Aug 2021 09:03 PM IST
सार

उपायुक्त किन्नौर आबिद हुसैन सादिक ने बताया कि किन्नौर जिले में भारी बरसात के चलते भूस्खलन, सड़कें खराब होने और बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। इस दौरान पहाड़ों का दरकना जारी है। उन्होंने जिले के लोगों और पर्यटकों से आग्रह किया कि वे नदी-नालों के समीप और ऊंचाई वाले स्थानों पर न जाएं। 

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himachal Weather today: many roads still disrupted in Himachal, rocks fell on the vehicle in Kinnaur, two days of heavy rain alert in the state
गाड़ी पर गिरीं चट्टानें और भूस्खलन से सड़क बंद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल में बारिश से बाढ़ और पहाड़ों से चट्टानें-पत्थर गिरने का सिलसिला जारी है। सोमवार को किन्नौर जिले में एनएच-5 पर पूर्वनी झूला के पास एक गाड़ी पहाड़ी से अचानक पत्थर गिरने से क्षतिग्रस्त हो गई है। हादसे में चालक और अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया है।

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उपायुक्त किन्नौर आबिद हुसैन सादिक ने बताया कि किन्नौर जिले में भारी बरसात के चलते भूस्खलन, सड़कें खराब होने और बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। इस दौरान पहाड़ों का दरकना जारी है। उन्होंने जिले के लोगों और पर्यटकों से आग्रह किया कि वे नदी-नालों के समीप और ऊंचाई वाले स्थानों पर न जाएं।
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किसी भी प्रकार की प्राकृतिक आपदा और घटना होने की स्थिति में वह जिला आपदा प्रबंधन परिचालन केंद्र के दूरभाष नंबर 01786,223151, 223155 और टौल फ्री नंबर 1077 पर संपर्क कर सकते हैं।
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 वहीं, कुल्लू के मणिकर्ण में बीते दिनों ब्रह्मगंगा नाले में बादल फटने के बाद सोमवार शाम करीब चार बजे भारी बारिश से रास्कट नाले में बाढ़ आ गई। हालांकि इससे कोई नुकसान नहीं हुआ। लेकिन लोगों में खौफ है। यह नाला भी ब्रह्मगंगा नाले से करीब चार किमी दूर है।

हमीरपुर के चकमोह में पशुशाला गिरने से मलबे में भैंस दब गई। ग्रामीणों और जेसीबी के सहयोग से भैंस को बचाया गया। नादौन के के वार्ड तीन में सोमवार सुबह एक घर में शौचालय का डंगा धसने से एक महिला भी मलबे के साथ खड्डे में गिर गई। शोर मचाने पर आस पड़ोस के लोगों ने महिला को मलबे के ढेर से निकालकर उसका उपचार करवाया। 

उधर, मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश में मंगलवार को भी बारिश के आसार जताए हैं। चार और पांच अगस्त को भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। प्रदेश में सोमवार शाम तक 218 सड़कों पर वाहनों की आवाजाही ठप रही।

इसमें शिमला में 87, कुल्लू में 33 और मंडी में 70 सड़कें बंद रहीं। 46 पेयजल योजनाएं अभी भी ठप हैं। इसमें 45 योजनाएं लाहौल-स्पीति जिला और एक शिमला जिला से है। प्रदेश में आठ अगस्त तक मौसम खराब रहने का पूर्वानुमान है।

सोमवार को प्रदेश के कुछ स्थानों पर बारिश हुई। राजधानी शिमला में दिन भर बादल छाए रहे। दोपहर बाद शहर में बूंदाबांदी हुई। सुंदरनगर, कल्पा, नाहन, पालमपुर, सोलन, मंडी, बिलासपुर, डलहौजी और कुफरी में भी बादल बरसे। सोमवार को प्रदेश का अधिकतम तापमान सामान्य रहा।

प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में मौसम मिलाजुला रहा। सोमवार को ऊना में अधिकतम तापमान 34.4, बिलासपुर में 32.5, मंडी-हमीरपुर में 32.2, कांगड़ा-भुंतर में 31.9, चंबा में 31.3, धर्मशाला में 28.4, सोलन में 28.0, नाहन में 27.8, कल्पा में 23.8, केलांग में 22.2, डलहौजी में 21.6 और शिमला में 21.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। 

उधर, रामपुर-गौरा मार्ग भूस्खलन की वजह से बाधित होने से क्षेत्र के हजारों लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। भारी भूस्खलन के कारण सड़क का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है।

मार्ग बाधित होने से बागवानों को अन्य वैकल्पिक मार्गों से सेब की फसल को मंडियों तक पहुंचाना पड़ेगा। इससे उन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ेगी। मार्ग बाधित होने से क्षेत्रों के लोगों को पैदल ही अपने गंतव्यों तक पहुंचना पड़ रहा है।

वहीं, आनी विकास खंड की ग्राम पंचायत आनी के बरगईधार में भारी बारिश के कारण निजी भूमि को नुकसान पहुंचा है। इस भूस्खलन में थबोली निवासी बिनी राम के बी स सेब के पौधे मलबे में दब गए हैं।

भूस्खलन होने का मुख्य कारण रुणा जुडवा सड़क में लगाए गए डंगे के लिए जरूरत से ज्यादा गहरी और ऊंची कटिंग बताया जा रहा है। इससे निजी भूमि के ढहने का खतरा बना हुआ है।
 

किरी री परेशी पहाड़ी से भूस्खलन, बाढ़ का खतरा

बरसात का मौसम शुरू होते ही सैंज घाटी में नदी किनारे बसी कई बस्तियों में माहौल डराने वाला है। निहारनी डैम के आगे किली री परेशी की पहाड़ी खिसकने से बाढ़ का खतरा अब भी बरकरार है। पिछले साल हुई भारी बारिश के दौरान निहारनी डैम से पानी छोड़ा गया तो इस पहाड़ी से भूस्खलन होना शुरू हुआ। संभावित खतरे को देख न्यूली गांव के लोगों ने अपना सामान समेटना शुरू कर दिया है। लोगों को डर था कि अगर यह पहाड़ी खिसकी तो नदी का बहाव रोक देगी। इस साल भी भूस्खलन से मलबा नदी के किनारे पहुंच चुका है। लोगों को डर है कि बरसात में यह मलबा तबाही का कारण बनेगा। घाटी में 2004 में आई बाढ़ से मिले जख्म अभी तक पूरी तरह नहीं भरे हैं। इस बाढ़ ने पूरे सिउंड बाजार को नक्शे से गायब कर दिया था।

सैंज बाजार में भारी नुकसान होने से लोग आज भी बाढ़ के नाम से सहम जाते हैं। 17 वर्ष पहले जीवा नाले में बादल फटने से मची तबाही का मंजर लोगों को आज भी याद है। हालांकि अब सैंज नदी पर बिजली परियोजनाओं के दो डैम बने हैं। पानी का बहाव टनल के भीतर मोड़ा गया है। गाड़ापारली पंचायत के पूर्व प्रधान भाग चंद, शैंशर के पूर्व प्रधान नरेश कुमार, शांघड़ की प्रधान गुड्डी देवी, देहुरीधार पंचायत के प्रधान भगत राम और पंचायत समिति सदस्य तारा सिंह राणा ने कहा कि किली री परेशी में भूस्खलन होने से नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। एसडीएम बंजार हेम चंद वर्मा ने कहा कि मौके पर जाकर स्थिति का आकलन किया जाएगा।

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