हिमाचल विस सत्र: सुखाश्रय विधेयक पर चर्चा के दौरान सुक्खू-जयराम में तीखी नोकझोंक
प्रदेश सुखाश्रय विधेयक पर चर्चा के दौरान सुक्खू-जयराम में तीखी नोकझोंक हुई। उन्होंने कहा कि यह संयोग है कि सुखाश्रय योजना मुख्यमंत्री के नाम के बहुत करीब है।
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हिमाचल प्रदेश सुखाश्रय विधेयक पर चर्चा के दौरान सुक्खू-जयराम में तीखी नोकझोंक हुई। उन्होंने कहा कि यह संयोग है कि सुखाश्रय योजना मुख्यमंत्री के नाम के बहुत करीब है। जब वह मुख्यमंत्री थे तो उन्हें भी अधिकारी कहते थे कि जयश्रीराम नाम के साथ योजना शुरू की जाए। वे इनकार करते थे कि केवल भाव होना चाहिए। ट्रेनिंग के दौरान अधिकारियों को गुर सिखाए गए होते हैं, जो बात नेता को सही लगे, वह करनी चाहिए। इस मामले में भी अधिकारियों की सलाह लग रही है। इस पर सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राजनीति हर जगह अच्छी नहीं लगती। हिमाचल प्रदेश सुखाश्रय विधेयक के नाम की बात है तो उनका नाम तो सुक्खू भी नहीं है सुखविंद्र ठाकुर है। चर्चा के बाद ध्वनिमत से विधेयक पारित किया गया।
चर्चा के दौरान जयराम ठाकुर ने कहा कि केंद्रीय एक्ट में भी वही बातें हैं, जो इस विधेयक में ली गई हैं। चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी भी वही है, जो केंद्रीय कानून में है। यह विधेयक केंद्रीय बिल की कॉपी है। ग्रीन स्टेट पर भी ऐसा कहा गया कि जैसे यह कहीं है ही नहीं है। केंद्र सरकार ने इस पर बहुत ध्यान दिया है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री धनीराम शांडिल ने कहा कि ये बहुत ही महत्वपूर्ण प्रस्ताव आया है। सीएम आश्रम ग्रहण करने से पहले बालिका आश्रम गए। इसकी भावना पर जाना चाहिए। शांडिल ने कहा कि हमें इसका समर्थन करना चाहिए।
सीएम सुक्खू ने कहा कि प्रतिपक्ष के नेता अपनी बात रख रहे थे। केंद्रीय एक्ट में कोई बदलाव नहीं होता। ये हिंदुस्तान का पहला एक्ट है, जिसे हिमाचल ने बनाया है। ये राज्य के द्वारा बजट प्रबंध के बाद बनाया कानून है। 101 करोड़ रुपये की एफडी की है। बीजेपी के विधायक इसमें योगदान दें। प्रतिपक्ष के नेता को पढ़कर आना चाहिए। इसमें उच्च शिक्षा की फीस देंगे। चार हजार रुपये पॉकेट मनी भी देंगे। हवाई जहाज से घुमाने का प्रबंध है और तीन सितारा होटल में ठहरने का भी प्रावधान है। हमने दया भाव नहीं, अधिकार दिया है। एक भी योजना जो भी आ रही है। हम विधवाओं के लिए भी एक विशेष योजना ला रहे हैं। आगे आगे देखिए होता है क्या? जयराम ने कहा - हमने राजनीतिक नजरिये की बात नहीं की। ऐसा नहीं है कि पीछे की सरकार ने किया ही नहीं। पहली बार में भाव से ज्यादा राजनीतिक प्रभाव होता है। हमने भी भाव में रहकर बहुत से निर्णय लिए हैं। मैं इस प्रावधान का विरोध नहीं कर रहा है।
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पहली बार राजीव गांधी के नाम को बाहर रखा गया : हंसराज
चुराह के भाजपा विधायक हंसराज ने तंज किया कि हर नेता चाहता है कि उनके जाने के बाद भी कुछ रहे। पहली बार राजीव गांधी के नाम को बाहर रखा गया। बेसहारा बच्चों के लिए विजन बहुत अच्छा है। चिल्ली बालिका आश्रम में कुछ न कुछ छेड़छाड़ करते हैं। एनएचपीसी ने पैसा दिया। अब आश्रम को चंबा ले जाने की बात के करें। बच्चियां वहां से जाना नहीं चाहतीं, क्यों वहां भेज रहे हैं। भाजपा विधायक त्रिलोक जम्वाल ने कहा कि ये जो बिल आया है, ये प्रदेश सरकार की पहल है। जुवेनाइल एक्ट 2015 में तमाम प्रावधान कवर हैं। चाइल्ड वेलफेयर कौंसिल का भी यही काम है।
अनाथ बच्चों को 27 साल के बाद भी देंगे मकान बनाने को जमीन
- सीएम बोले कि 27 साल की उम्र तक यह बच्चे अनाथाश्रम में रह सकते हैं। उसके बाद भी उनके पास अगर अपनी जमीन नहीं होगी तो उन्हें घर बनाने को तीन बिस्वा और चार बिस्वा जमीन देंगे। अगर जमीन नहीं होगी तो भी भूमि देंगे। 6000 बच्चों को कानूनी अधिकार मिल गया।