विपक्ष का सदन में प्रदर्शन विधानसभा का अपमान: वीरभद्र
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मानसून सत्र में तीन दिन से विपक्ष के हंगामे पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि विपक्ष का सदन में प्रदर्शन विधानसभा का अपमान है। सदन में झूठी बातें बोलकर, नारेबाजी और गाली गलौच से विधानसभा की गरिमा को गिराया है। उन्होंने कहा कि सदन चर्चा के लिए होता है। विपक्ष को चर्चा के लिए आगे आना चाहिए।
तीसरे दिन हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद पत्रकारों से बातचीत में वीरभद्र सिंह ने कहा कि कानून व्यवस्था की बिगड़ी नहीं है बल्कि इस बारे में विपक्ष गलत प्रचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश का कोई भी राज्य अपराध मुक्त नहीं है, लेकिन इसकी तुलना में हिमाचल में अपराधों का ग्राफ बहुत कम है।
उन्होंने दावा किया कि राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में है। सीएम ने कहा कि गुड़िया मामले में सीबीआई की जांच चल रही है और जल्द ही दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने इस मामले में तुरंत कार्रवाई की और इसी के चलते अपराधियों को पकड़ा जा सका है।
उन्होंने माना कि गुड़िया मामले में कुछ दस्तावेज नष्ट भी हुए हैं, लेकिन ये दस्तावेज बीजेपी नेता नरेंद्र बरागटा की अगुवाई में कोटखाई थाने को जलाने के कारण नष्ट हुए हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने गुड़िया मामले को सोची समझी साजिश के तहत भड़काया और लोगों को थाना फूंकने के लिए उकसाया।
सीएम ने कहा कि होशियार सिंह मामले में हाईकोर्ट ने चालान पेश न करने के निर्देश दिए हैं। इसी कारण सरकार अभी तक इस मामले में चालान पेश नहीं कर पाई है। धर्मपुर गैंग रेप मामले में वीरभद्र सिंह ने कहा कि इस संबंध में तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और आगे की कार्रवाई जारी है।
एसआईटी के सीबीआई को सहयोग नहीं देने के सवाल पर सीएम ने कहा कि उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश पुलिस इस प्रकरण से जुड़ा हर तथ्य और जानकारी सीबीआई से साझा करे।
सदन में भाजपा का रवैया ठीक न होने से कांग्रेस पार्टी आक्रामक
विधानसभा सत्र में भाजपा विधायकों के लगातार हंगामे पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने कड़े तेवर अख्तियार किए हैं। प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के चेयरमैन नरेश चौहान ने कहा कि भाजपा मुद्दा विहीन है, इसके चलते विधायक सदन में कार्यवाही को बाधित करने लगे हैं। सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है।
इसलिए भाजपा को वाकआउट करने की बजाय चर्चा में अपनी बात रखनी चाहिए। सदन के भीतर हल्ला करना नई बात नहीं है। जब से भाजपा विपक्ष में बैठी है, उनका शर्मनाक और निंदनीय रवैया रहा है। विधानसभा की अपनी एक गरिमा और अहमियत है।
विधानसभा सत्र से लोगों को उम्मीदें रहती हैं कि जनहित में बिल पास होंगे और नए कानून बनेंगे। साथ ही नए निर्णय लिए जाएंगे, लेकिन विपक्ष ने नकारात्मक रवैये ने अजीब परिस्थिति पैदा कर दी है। भाजपा विधायक सदन में बैठते ही वाकआउट का बहाना ढूंढना शुरू कर देते हैं।
चुने हुए जनप्रतिनिधियों को बेवजह हंगामा करने की बजाय सदन में लोगों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शुरू से ही सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभाने में नाकाम रही है, क्योंकि सरकार के साथ साथ विपक्ष की भी सदन को चलाने में अहम जिम्मेवारी रहती है।