सदन में इस मुद्दे पर एकजुट हुआ सत्ता पक्ष और विपक्ष
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वन विभाग की ओर से सरकारी भूमि पर उगाए सेब के पेड़ कटान के खिलाफ पक्ष और सत्ता पक्ष एकजुट नजर आए। नियम - 63 के तहत विधायकों ने प्रदेश सरकार से हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम में चुनौती देने की मांग की। विधायकों ने जहां अवैध कब्जाधारियों के लिए नीति बनाने की मांग की वहीं सरकार से हाईकोर्ट में तथ्यों के साथ मजबूत पक्ष रखने की भी बात कही।
भाजपा विधायक महेंद्र सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री ने गरीब दलित और भाजपा कार्यकर्ताओं के पेड़ों पर कुल्हाड़ी चल रही है, रसूखदारों पर विभाग कार्रवाई नहीं कर रहा है। तीन पुश्तों से लोगों ने सेब के पेड़ लगाए हैं, आज इन पर कुल्हाड़ी चलाई जा रही है।
सरकार लोगों के मकान और गौशालाओं को हटा रही है। लोगों के बिजली और पानी के कनेक्शन काटे जा रहे हैं। चर्चा में भाग लेते हुए सीपीएस रोहित ठाकुर ने कहा कि बागवानों के 50 साल पुराने सेब के पेड़ काटे जा रहे हैं। जो चिंताजनक है।
विधायक बोले, हिमाचल की इकोनोमी पर पड़ेगा फर्क
हिमाचल में तकरीबन सभी लोगों ने अतिक्रमण किया है। अगर यही स्थिति बनी रही तो छोटे किसान बागवानों के लिए यह कष्टदायी होगा। लोग आत्मदाह भी कर सकते हैं। विधायक विक्रम सिंह ने कहा कि सरकार को इस मामले में कोई चिंता नहीं है। उन्होंने सरकार से इस मामले पर ग्रीन ट्रिब्यूनल या सुप्रीम कोर्ट जाने की मांग की। सीपीएस नंद लाल ने कहा कि मामला गंभीर है।
किसान और बागवान दुविधा में है। इससे हिमाचल की इकोनोमी पर भी फर्क पड़ेगा। भाजपा विधायक जय राम ठाकुर और विधायक बलवीर वर्मा ने सरकार से कार्रवाई रोकने की मांग की। विधायक महेश्वर सिंह ने कहा कि बागवानों से सेब के पेड़ को बच्चों की तरह पाला है। इन्हें काटना ठीक नहीं।
बंदरों और जंगली जानवरों से निजात दिलाएगी सरकार
प्रदेश सरकार जनता को बंदरों से निजात दिलाएगी। इसके लिए सरकार ने जंगलों में वन वाटिका बनाने का फैसला लिया है। बंदरों के आतंक को लेकर सदन में चिंता जताई। इस मामले पर पक्ष और विपक्ष के विधायक एकजुट नजर आए। राज्य के उन क्षेत्रों को केंद्र सरकार से वर्मिंग घोषित करवाने की भी मांग की गई जहां पर बंदरों का आतंक अधिक है। वन मंत्री भरमौरी ने कहा कि भारत
सरकार को बंदर एक्सपोर्ट करने के मामले में आग्रह किया है, लेकिन इस पर स्वीकृति नहीं मिली। विपक्ष के नेता धूमल ने कहा कि उनके एरिया में बंदरों का आतंक हैं। भारत सरकार ने वर्मिंग घोषित करने के लिए जिन क्षेत्रों के नाम मांगे थे, इसमें शिमला और हमीरपुर का नाम भेजा जाना चाहिए। उन्होंने मंकी कलिंग पर हाईकोर्ट के स्टे को हटाने के लिए सरकार से मजबूत पक्ष रखने की बात कही।
खड्डों के तटीकरण के लिए केंद्र नहीं कर रहा मदद- आईपीएच मंत्री विद्या स्टोक्स ने कहा कि खड्डों के तटीकरण के लिए कें द्र सरकार मदद नहीं कर रही है। फाइलें केंद्र सरकार के पास पेडिंग हैं। स्टोक्स ने यह जानकारी विधायक इंद्र सिंह की ओर से पूछे गए प्रश्न के उत्तर में दी। स्टोक्स ने कहा कि केंद्रीय जल आयोग से इस बारे पत्राचार किया जा रहा है। उनकी स्वीकृति मिलने के बाद बरच्छवाड से जाहू तक सीर खड्ड के तटीकरण का कार्य किया जाएगा। विधायक राकेश कालिया ने स्वां तटीकरण का मुद्दा भी उठाया।
सांडों के हमले से घायल के इलाज का खर्चा उठाएगी प्रदेश सरकार
विधायक अजय महाजन की ओर से पूछे गए प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि सांडों के हमले से घायल होने वाले लोगों को सरकार मुआवजे के साथ इलाज का खर्च देगी। महाजन ने बताया कि एक महिला को तीन दिन पहले सांड ने घायल कर
दिया जिसे मुआवजा नहीं दिया गया। इस मामले में भाजपा विधायक रविंद रवि ने ऊना में सांडों की ओर से एक परिवार के तीन लोगों को मारने का मामला उठाया। मुख्यमंत्री ने इन मामलों को गंभीर से निपटने की बात कही।
धूमल बोले, बागवानों को मिले राहत- अवैध कब्जे को लेकर नेता प्रतिपक्ष धूमल ने कहा कि बागवानों को राहत मिलनी चाहिए। सभी विधायक अवैध कब्जों को लेकर नीति बनाने में एकजुट है। कानून बनाकर उसे हाईकोर्ट में मजबूती के साथ रखा जा सकता है। सेब के पेड़ तैयार होने में वर्षों लग जाते है, इसमें सरकार को गंभीरता दिखाने की जरूरत है।
जमीन नाम करवाने को आवेदन करें विभाग: कौल
राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा है कि जिन विभागों के पास भवन है, लेकिन जमीन विभागों के नाम नहीं हो रही है, वह उपायुक्त के समक्ष इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। उपायुक्त एक हेक्टेयर तक जमीन विभागों के नाम कर सकते हैं जबकि डेढ़ हेक्टेयर तक जमीन विभागों के नाम करने की शक्तियां डिवीजनल कमिश्नर को है।
इससे ज्यादा जमीन का मामला प्रदेश सरकार को भेजा जा सकता है। विधायक विक्रम सिंह के सवाल के उत्तर में कौल सिंह ने सदन को बताया कि 1577 ऐसे सरकारी कार्यालय भवन हैं जिसमें संबंध विभाग को भूमि का कब्जा राजस्व रिकॉर्ड में स्थानांतरित नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि सरकार ने हाल ही में निर्णय लिया है।