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हिमाचल: बिना शिक्षक वाले प्राथमिक स्कूलों में भेजे जाएंगे टीजीटी और प्रवक्ता, शारीरिक शिक्षक भर्ती अपडेट भी

Sat, 25 Apr 2026 11:22 AM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Sat, 25 Apr 2026 11:22 AM IST
सार

हिमाचल में शिक्षा विभाग ने बिना शिक्षक वाले प्राथमिक विद्यालयों में अब टीजीटी, सीएंडवी और प्रवक्ताओं की सेवाएं अनिवार्य रूप से लेने का फैसला लिया है। इसके साथ ही प्रदेश में शारीरिक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। पढ़ें पूरी खबर... 

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Himachal TGTs and Lecturers to be Posted to Primary Schools Lacking Teachers
शिक्षा विभाग हिमाचल प्रदेश। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में स्कूल कांप्लेक्स व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने बिना शिक्षक वाले प्राथमिक विद्यालयों में अब टीजीटी, सीएंडवी और प्रवक्ताओं की सेवाएं अनिवार्य रूप से लेने का फैसला लिया है। विभाग ने सभी राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों के प्रधानाचार्यों और कांप्लेक्स प्रभारियों को इस बाबत निर्देश जारी किए हैं। स्कूल शिक्षा निदेशक ने बताया कि पहले जारी दिशा-निर्देशों के बावजूद कई कांप्लेक्स प्रमुख इन आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं। खासकर ऐसे प्राथमिक विद्यालय, जहां एक भी शिक्षक तैनात नहीं है या शिक्षकों की भारी कमी है, वहां उच्च विद्यालयों और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों से स्टाफ की डेपुटेशन नहीं की जा रही है। उन्होंने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि यह स्थिति विद्यार्थियों के भविष्य के साथ समझौता है। 

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कांप्लेक्स प्रणाली का मुख्य उद्देश्य ही संसाधनों और मानव बल का साझा उपयोग (शेयरिंग ऑफ मैनपावर) है, ताकि किसी भी स्कूल में पढ़ाई बाधित न हो। ताजा निर्देशों के अनुसार मिडल , हाई और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों से टीजीटी, सीएंडवी और प्रवक्ताओं को जरूरत के अनुसार प्राथमिक स्कूलों में भेजा जाएगा। ऐसे प्राथमिक स्कूल, जहां दो जेबीटी शिक्षक उपलब्ध हैं और छात्र संख्या 15 से अधिक है, वहां से किसी भी शिक्षक की डेपुटेशन नहीं की जाएगी। जिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, वहां प्राथमिकता के आधार पर स्टाफ उपलब्ध कराया जाएगा। निदेशक आशीष कोहली ने स्पष्ट किया गया कि शेयरिंग ऑफ मैनपावर ही स्कूल कांप्लेक्स व्यवस्था की मूल भावना है।

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स्कूलों में शिक्षक नहीं होने पर प्रिंसिपल होंगे जिम्मेवार
प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों के नियुक्त ना होने के लिए स्कूल कांप्लेक्स के प्रिंसिपल जिम्मेवार होंंगे। बिना शिक्षक और एकल शिक्षक वाले प्राथमिक स्कूलों की बढ़ती संख्या पर शिक्षा विभाग ने जवाबदेही करने का फैसला लिया है। स्कूल शिक्षा निदेशालय से जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि अब किसी भी सूरत में कोई भी प्राथमिक विद्यालय बिना शिक्षक के नहीं रहेगा। पत्र में कहा है कि राज्य में शिक्षक-छात्र अनुपात देश में बेहतर स्थिति में है। प्राथमिक स्तर पर 12, मिडिल में 7, हाई स्कूल में 8 और वरिष्ठ माध्यमिक स्तर पर 11 का पीटीआर होने के बावजूद स्कूलों में शिक्षक की कमी का मुद्दा प्रबंधन की खामी को दर्शाता है। 
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स्कूलों में शारीरिक शिक्षकों के पद भरने के लिए 3 और 4 जून को काउंसलिंग
प्रदेश में शारीरिक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। स्कूल शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी जिलों में रिक्त पड़े पदों को भरने के लिए बैचवाइज आधार पर काउंसलिंग प्रक्रिया करने का निर्णय लिया है। इसके तहत 3 और 4 जून 2026 को सभी जिलों में काउंसलिंग होगी। 

निदेशालय की ओर से जारी पत्र के अनुसार यह काउंसलिंग संबंधित जिला उपनिदेशक (प्रारंभिक शिक्षा) कार्यालयों में आयोजित की जाएगी। अभ्यर्थियों को केवल अपने गृह जिले में ही काउंसलिंग में भाग लेने की अनुमति होगी। अन्य किसी जिले में काउंसलिंग में शामिल होने के आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। अभ्यर्थियों को काउंसलिंग के दौरान जिलों, स्कूलों की वरीयता भरनी होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि एक बार दी गई प्राथमिकता किसी भी परिस्थिति में बदली नहीं जाएगी। ऐसे में उम्मीदवारों को विकल्प भरते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। प्रदेशभर में कुल 355 पदों को भरा जाएगा।

यह रहेंगे योग्यता के मापदंड
शारीरिक शिक्षक पद के लिए अभ्यर्थी के पास 50 फीसदी अंकों के साथ बारहवीं कक्षा और दो वर्षीय डीपीएड डिप्लोमा, 50 फीसदी अंकों के साथ बीपीएड डिग्री, स्नातक के साथ फिजिकल एजुकेशन विषय में 50 फीसदी अंक में से कोई एक योग्यता होना अनिवार्य किया गया है। पूर्व सैनिकों के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। खेलों में राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भाग लेने वाले अभ्यर्थियों को अंकों में 5 फीसदी तक की छूट भी दी जाएगी। 
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