पंचायत का रिकॉर्ड गायब, राज्य सूचना आयोग तल्ख
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पंचायत का रिकॉर्ड गायब होने के कारण राज्य सूचना आयोग तल्ख हो गया है। आयोग ने पंचायतीराज सचिव के नोटिस में मामला लाते हुए इस रिकॉर्ड के कस्टोडियन के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।
एक अपीलकर्ता ने शिमला की रामपुर तहसील की ग्राम पंचायत प्रधान और उपप्रधान की संपत्ति के बारे में जानकारी मांगी थी। इसे 2005, 2010 और 2015 में दायर किए गए नामांकन पत्रों के आधार पर मांगा गया था, मगर 2005 और 2010 की यह सूचना उपलब्ध नहीं थी।
रामपुर क्षेत्र के ही कियारू निवासी सोहन लाल ने यह सूचना खंड विकास अधिकारी रामपुर के कार्यालय स्थित जनसूचना अधिकारी अधीक्षक से यह सूचना मांगी, मगर उसे पूरी सूचना नहीं दी गई।
पंचायत निरीक्षक ट्रेस नहीं कर पाए
अपील में अपना पक्ष रखते हुए अधीक्षक ने बताया कि यह सूचना कस्टोडियन यानी पंचायत निरीक्षक ट्रेस नहीं कर पाए हैं। अपीलकर्ता ने कहा कि वह उम्मीदवारों की ओर से विभिन्न वर्षों में बताई गई आय की तुलना करना चाह रहे थे, मगर यह सूचना उन्हें नहीं दी गई।
अपीलकर्ता ने यह भी कहा कि जानबूझकर इस सूचना को छिपाया जा रहा है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने पाया कि अपीलकर्ता की ओर से जो सूचना मांगी गई, वह सामान्य प्रकृति की है।
यह कहना कि सूचना ट्रेस नहीं की जा पा रही है, इसे आयोग में स्वीकार नहीं किया जा सकता है। आरटीआई एक्ट का उद्देश्य ही सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाना है।
इससे हर पब्लिक अथारिटी की जवाबदेही भी बढ़ती है। आयोग ने कहा कि अगर यह सूचना ट्रेस हो जाती है तो इसे अपीलकर्ता को बगैर शुल्क के तत्काल दे दिया जाए।