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चार साल में फल देने लगेगा अखरोट का ये पौधा
सुरेश शांडिल्य/अमर उजाला, शिमला
Updated Wed, 03 Sep 2014 11:46 AM IST
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ड्राई फ्रूट अखरोट का पौधा अब चार साल में फल देने लगेगा। हिमाचल में तैयार की गई नई ‘पूसा खोड़’ किस्म से ये संभव हो सकेगा। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के शिमला केंद्र ने इस किस्म को ईजाद किया है।
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ये किस्म 900 से 3000 मीटर ऊंचाई पर देश में कहीं भी उगाई जा सकती है। वैज्ञानिकों ने इसका सफल प्रयोग भी कर दिखाया है। सामान्य तौर पर अखरोट का पौधा 10 से 15 साल बाद फल देने लगता है। हिमाचल में कई स्थानों पर अखरोट पैदा होता है।
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नई किस्म से सूबे में अखरोट उत्पादन में नए आयाम स्थापित हो सकते हैं। कृषि अनुसंधान संस्थान के क्षेत्रीय केंद्र शिमला के प्रधान वैज्ञानिक डा. कल्लोल कुमार प्रामाणिक और डा. अनिल शुक्ला ने यह किस्म संयुक्त रूप से तैयार की है।
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चंबा जिले से लाए पौधे से पूसा खोड़ तैयार किया है। इसे प्रयोग के तौर पर शिमला के ढांडा स्थित प्लांट में उगाया गया। चार वर्ष में ही इस किस्म के पौधे ने फल देने शुरू कर दिए। इस किस्म के पौधे सामान्य अखरोट के पौधों की अपेक्षा काफी छोटे होते हैं।
इन देशों में हैं अखरोट की मांग
डा. प्रामाणिक का कहना है कि भारत के अखरोट की स्पेन, मिस्र, जर्मनी, नीदरलैंड, यूके, फ्रांस और ताईवान में काफी मांग है। ऐसे में जल्दी फसल देने वाले इस अखरोट से निर्यात भी बढ़ सकता है। हिमाचल में इस किस्म की सफलता को देखते हुए उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश के बागवानी संस्थानों ने पूसा खोड़ की मांग की है।
प्रयोग के तौर पर कुछ पौधे वहां भेजे जा रहे हैं। पूसा खोड़ को दांत से भी तोड़ा जा सकता है। इसका छिलका सामान्य अखरोट से काफी पतला होता है। इस किस्म के पौधों को सर्दियों में लगाया जा सकता है।