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हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा, साफ पानी देने के लिए क्या कदम उठाए
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Wed, 29 Nov 2017 12:12 PM IST
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हिमाचल हाईकोर्ट
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हिमाचल हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को आदेश दिए हैं कि वह अपने निजी शपथ पत्र के माध्यम से कोर्ट को बताएं कि सरकार द्वारा अपने नागरिकों को साफ व स्वास्थ्य वर्धक पानी मुहैया करवाने के अपने संवैधानिक दायित्वों को निभाने के लिए क्या कारगर कदम उठाए हैं।
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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने मुख्य सचिव को आदेश दिए कि वह प्रदेश के हर निवासी को स्वच्छ पानी मुहैया करवाने के लिए कारगर कदम उठाए। कोर्ट ने यह सवाल रोहड़ू तहसील के तहत सेरी बटाड़ा निवासियों द्वारा कोर्ट को पत्र लिखने के बाद किया है।
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लोगों ने पत्र में कोर्ट को बताया था कि उन्हें पीने के पानी की कमी से जूझना पड़ रहा है। पत्र में बताया गया कि आईपीएच विभाग द्वारा मुहैया करवाया जा रहा पानी पीने योग्य नहीं है और इससे बहुत से लोग बीमार हो रहे हैं। कोर्ट ने इस पत्र पर संज्ञान लेने के बाद कहा कि स्वच्छ व स्वास्थ्य वर्धक पानी मुहैया करवाना सरकार का संवैधानिक दायित्व है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को शपथ पत्र दायर करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।
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कूड़ा प्रबंधन के लिए हाईकोर्ट ने डीसी बिलासपुर को दिए निर्देश
प्रदेश हाईकोर्ट ने घुमारवीं में कूड़े के उचित प्रबंधन को लेकर दायर याचिका में जिलाधीश बिलासपुर को आदेश दिए कि नगर परिषद घुमारवीं, नागरिक सभा सदस्य, भदसिन व बजोहा गांव के लोगों को बुलाकर इस बारे में एक मीटिंग करें।
जिलाधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि स्थानीय लोगों को जागरूक कर एक स्थायी डंपिंग साइट में ही कूड़ा फेंकें। मुख्य कार्यवाहक न्यायाधीश संजय व न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने इस मामले से जुड़ी सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किए।
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जीने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है जिसकी सुरक्षा करना प्रदेश सरकार का दायित्व है। कोर्ट ने जिलाधिकारी बिलासपुर को आदेश दिए कि वह चार सप्ताह के भीतर आदेशों पर अमल कर अनुपालना रिपोर्ट कोर्ट में दायर करें।
शराब कारोबारियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज
हिमाचल हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को 6.68 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व नुकसान पहुंचाने के मामले में 5 शराब कारोबारियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। न्यायाधीश सीबी बारोवालिया ने जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि आरोपियों ने सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया है और ये आरोपी जमानत की सूरत में सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं।
मामले के अनुसार हिमाचल प्रदेश बेवरेजेज लिमिटेड के जनरल मैनेजर सुरजीत सिंह राठौर ने 27 मार्च 2017 को बद्दी के थाना बरोटीवाला में शिकायत दर्ज की कि ईटीआई अंकुश चौहान ने आरोपियों से मिलकर 3 करोड़ 22 लाख से अधिक का नुकसान सरकारी खजाने को पहुंचाया।
जांच के बाद पाया गया कि ईटीआई अंकुश चौहान व मैनेजर अजय राठौर ने आरोपी शराब कारोबारियों को 6.68 करोड़ से अधिक की शराब उधार में वितरित कर दी। पुलिस की जांच रिपोर्ट के अनुसार जमानत प्रार्थी भूपिंद्र सिंह ने 78 लाख से अधिक, चंचल कुमार
ने 1 करोड़ 89 लाख, राकेश शर्मा ने 47 लाख 41 हजार, जोगिंद्र लाल ने 1 करोड़ 30 लाख व किशोरी लाल ने करीब 24 लाख रुपये की सरकारी खजाने को चपत लगाई। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस मामले में आरोपी ईटीआई अंकुश चौहान को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस रिपोर्ट के अवलोकन करने के बाद उपरोक्त प्रार्थियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
अब कभी भी गिरफ्तार हो सकते हैं ठेकेदार
बद्दी (सोलन)। सनसिटी के पास शराब गोदाम से बिना बिलों और उधारी के 2.50 करोड़ की शराब के मामले में पांचों ठेकेदार अब कभी भी गिरफ्तार किए जा सकते हैं।
वहीं, मुख्य आरोपी ईटीआई अंकुश चौहान को भी पुलिस ने अदालत में पेश किया। जहां से उन्हें 30 नवंबर तक दोबारा पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। एसपी बद्दी राहुल नाथ ने कहा कि पुलिस ठेकेदारों को गिरफ्तार करने में जुट गई है। बुधवार तक सभी ठेकेदार पुलिस की गिरफ्त में होंगे।
यह है मामला
बद्दी सनसिटी के समीप प्रदेश सरकार का एल-1 शराब का गोदाम है। यहां से सोलन, सिरमौर, शिमला और किन्नौर के ठेकेदारों को शराब सप्लाई होती है। पहली जुलाई 2016 से आरोपी इंस्पेक्टर अंकुश चौहान बद्दी में तैनात था।
उस समय से घपले शुरू हो गए। आरोप है कि इंस्पेक्टर ने कानून ताक पर रखकर ठेकेदारों को शराब उधार देना शुरू कर दी जबकि नकद पैसे के बगैर एक भी बोतल गोदाम से बाहर नहीं जा सकती।
विभाग ने ऑडिट करवाया तो घपले का खुलासा हुआ। विभाग ने मार्च 2017 में इसकी जांच बैठाई और इंस्पेक्टर को निलंबित करके पुलिस में मामला दर्ज करवाया।