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कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा पर फोकस रह सकता है जयराम सरकार का पहला बजट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Updated Fri, 16 Feb 2018 10:47 AM IST
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हिमाचल के मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जयराम ठाकुर नौ मार्च को अपनी सरकार का पहला बजट पेश करेंगे। जयराम के इस पहले वार्षिक बजट में हाल ही में पेश केंद्रीय बजट की ‘मेरा गांव मेरा देश’ वाली छाप नजर आ सकती है।
वित्तीय वर्ष 2018-19 के इस बजट का कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा पर खास फोकस रह सकता है। विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने चुनाव घोषणापत्र के स्थान पर अपना स्वर्णिम दृष्टिपत्र -2017 में हिमाचल की जनता से कई वायदे किए थे। अपने पहले बजट अनुमानों में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर इन वायदों को लेकर कई प्रावधान कर सकते हैं।
वर्तमान में हिमाचल प्रदेश करीब 45 हजार करोड़ रुपये के कर्जे में डूबा है। खुद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर इससे चिंतित हैं। इस बार प्रदेश का बजट अनुमान भी लगभग 45 हजार करोड़ रुपये तक रखा जा सकता है, जो पिछले बजट में 40 हजार करोड़ रुपये के आसपास रहा है। इसमें राज्य को कर्जमुक्त करने के लिए संसाधनों को विकसित करने पर भी जोर दिया जा सकता है।
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इस बार कृषि भूमि के विकास कार्यों में लगने पर मुआवजे को दोगुने से चौगुना करने के स्वर्णिम दृष्टिपत्र के वायदे को भी सरकार बजट में शामिल कर सकती है। सोलर पंपिंग से खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने के लिए एक व्यापक योजना की घोषणा हो सकती है।
सेब, आम और संतरे के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी, दूध खरीद की दर और फ सल बीमा योजना का दायरा बढ़ाने, मार्केटिंग कमेटियों की कार्यप्रणाली में सुधार लाने, कृषि उपकरणों के लिए सब्सिडी, ऋण देने, सोलर फेंसिंग योजना में अतिरिक्त बजट प्रावधान करने, प्रदेश में केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय खोलने, पॉली हाउस की फिल्म बदलने को भी 80 फीसदी सब्सिडी, सीए स्टोर खोलने, सेब बागवानी एवं चाय उद्योग को बढ़ावा देने को नई योजनाएं शुरू करने जैसे कई वायदों का बजट घोषणाओं में जिक्र हो सकता है।
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वित्तीय वर्ष 2018-19 के इस बजट का कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा पर खास फोकस रह सकता है। विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने चुनाव घोषणापत्र के स्थान पर अपना स्वर्णिम दृष्टिपत्र -2017 में हिमाचल की जनता से कई वायदे किए थे। अपने पहले बजट अनुमानों में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर इन वायदों को लेकर कई प्रावधान कर सकते हैं।
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वर्तमान में हिमाचल प्रदेश करीब 45 हजार करोड़ रुपये के कर्जे में डूबा है। खुद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर इससे चिंतित हैं। इस बार प्रदेश का बजट अनुमान भी लगभग 45 हजार करोड़ रुपये तक रखा जा सकता है, जो पिछले बजट में 40 हजार करोड़ रुपये के आसपास रहा है। इसमें राज्य को कर्जमुक्त करने के लिए संसाधनों को विकसित करने पर भी जोर दिया जा सकता है।
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इस बार कृषि भूमि के विकास कार्यों में लगने पर मुआवजे को दोगुने से चौगुना करने के स्वर्णिम दृष्टिपत्र के वायदे को भी सरकार बजट में शामिल कर सकती है। सोलर पंपिंग से खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने के लिए एक व्यापक योजना की घोषणा हो सकती है।
सेब, आम और संतरे के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी, दूध खरीद की दर और फ सल बीमा योजना का दायरा बढ़ाने, मार्केटिंग कमेटियों की कार्यप्रणाली में सुधार लाने, कृषि उपकरणों के लिए सब्सिडी, ऋण देने, सोलर फेंसिंग योजना में अतिरिक्त बजट प्रावधान करने, प्रदेश में केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय खोलने, पॉली हाउस की फिल्म बदलने को भी 80 फीसदी सब्सिडी, सीए स्टोर खोलने, सेब बागवानी एवं चाय उद्योग को बढ़ावा देने को नई योजनाएं शुरू करने जैसे कई वायदों का बजट घोषणाओं में जिक्र हो सकता है।
jairam
स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए भी बजट में कई प्रावधान किए जा सकते हैं। इनमें हिमाचल प्रदेश में हर जिले में नर्सिंग स्कूल खोलने, हर सब डिवीजन में पूर्ण सुविधायुक्त अस्पताल खोलने, चंबा में आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना करने, हिमाचल प्रदेश में एयर एंबुलेंस की सुविधा शुरू करने, नए जन औषधि केंद्र खोलने, आम लोगों को स्वास्थ्य बीमा कवर देने, हर जिले में ट्रोमा सेंटर खोलने, कुपोषित बच्चों के लिए पोषण निगरानी प्रणाली को शुरू करने जैसी योजनाओें के भी बजट में प्रावधान हो सकते हैं।
शिक्षा क्षेत्र के लिए भी बजट में काफी कुछ हो सकता है। इनमें शिक्षण संस्थानों को वाई-फाई सुविधा से जोड़ने, सरकारी स्कूलों में बेहतरीन शिक्षा प्रणाली शुरू करने, फीस ढांचे को दुरुस्त करने, विद्यार्थी क्रेडिट कार्ड योजना शुरू करने, अटल स्कूल वर्दी योजना के तहत बच्चों को मुफ्त स्कूल बैग और जूते का प्रावधान करने, स्कूलों में कोचिंग केंद्र शुरू करने, निशुल्क परीक्षण करने जैसी योजनाएं शामिल की जा सकती हैं। हिमाचल को एनीमिया, कुष्ठरोग, तपेदिक और एड्स रहित बनाने की दिशा में काम होगा।
शिक्षा क्षेत्र के लिए भी बजट में काफी कुछ हो सकता है। इनमें शिक्षण संस्थानों को वाई-फाई सुविधा से जोड़ने, सरकारी स्कूलों में बेहतरीन शिक्षा प्रणाली शुरू करने, फीस ढांचे को दुरुस्त करने, विद्यार्थी क्रेडिट कार्ड योजना शुरू करने, अटल स्कूल वर्दी योजना के तहत बच्चों को मुफ्त स्कूल बैग और जूते का प्रावधान करने, स्कूलों में कोचिंग केंद्र शुरू करने, निशुल्क परीक्षण करने जैसी योजनाएं शामिल की जा सकती हैं। हिमाचल को एनीमिया, कुष्ठरोग, तपेदिक और एड्स रहित बनाने की दिशा में काम होगा।