हिमाचल पुलिस कांस्टेबल भर्ती में बड़ा गड़बड़झाला, फेल कैंडीडेट फिजिकल टेस्ट में कर दिए पास
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कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान 2016 में हुई हिमाचल पुलिस कांस्टेबल भर्ती में बड़े गड़बड़झाले की बात सामने आई है। कुछ आवेदकों की शिकायतों के बाद हाईकोर्ट के निर्देश पर पुलिस मुख्यालय के स्तर पर करवाई विभागीय जांच में इसका खुलासा हुआ है। जांच में पाया गया कि शारीरिक योग्यता के मापदंड पूरा न करने के बावजूद कुछ उम्मीदवारों को पुलिस अफसरों ने अपने रसूख से पास करवा दिया।
डीजीपी एसआर मरडी ने प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देश पर विभागीय जांच कराने की पुष्टि की है। पुलिस मुख्यालय अब सरकार से जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश करने की तैयारी में है। साल 2016 में वीरभद्र सरकार ने 1200 पुरुष और 300 महिला कांस्टेबलों के पद भरने को मंजूरी दी। विभाग ने 15 मार्च, 2016 तक आवेदन स्वीकार किए। इसके बाद जिलावार भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई।
आरक्षी के लिए उम्र के अलावा लंबाई, सीना और शैक्षणिक योग्यता की न्यूनतम सीमा तय थी। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार विभागीय जांच में शिमला व ऊना जिले में भर्ती में गड़बड़ी सामने आई है। न्यूनतम शारीरिक अर्हता पूरा न करने के बावजूद कुछ उम्मीदवारों को न सिर्फ भर्ती परीक्षा में पास कराया, बल्कि ट्रेनिंग के बाद उनकी नियुक्ति तक हो गई।
नप सकते हैं जिम्मेदार अफसर
इस बीच, कुछ आवेदकों ने हाईकोर्ट में अपात्रों की नियुक्ति को चुनौती दे दी। महकमे ने हाईकोर्ट के निर्देश पर ऐसे उम्मीदवारों की दोबारा शारीरिक दक्षता परीक्षा ली और मेडिकल में वे अनफिट पाए गए, लेकिन अभी तक उनकी नौकरी पर कोई फैसला नहीं लिया गया। सत्ता से नजदीकी के चलते पुलिस अधिकारियों पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस बीच, सूबे का निजाम बदल गया और सत्ता में जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार आ गई।
सरकार के सख्त रुख के बाद पुलिस मुख्यालय अब शिमला और ऊना के संबंधित कुछ पुलिस अधिकारियों और टेस्ट में पास करने वाले डाक्टरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश करने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि जल्द ही घोटाले में शामिल अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। वहीं नियमों के विपरीत नौकरी पर लगे लोगों पर फैसला कोर्ट करेगा।