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हिमाचल: चीड़ के जंगलों में लगेंगे चौड़ी पत्तियों वाले पेड़, कमेटी ने दीर्घकालिक समाधान सुझाया

Sun, 21 Jun 2026 02:30 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Sun, 21 Jun 2026 02:30 PM IST
सार

चीड़ के जंगलों को चौड़ी पत्ती वाले पेड़ों में बदला जाएगा। चौड़ी पत्ती वाले वनों को विकसित किया जाएगा। 

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Himachal: Pine forests to be replaced with broad-leaved trees; committee suggests long-term solution.
चीड़ का जंगल। - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के चीड़ के जंगलों को चौड़ी पत्ती वाले पेड़ों में बदला जाएगा। चौड़ी पत्ती वाले वनों को विकसित किया जाएगा। इससे वनाग्नि की घटनाओं पर अंकुश लगेगा और हरियाली भी बढ़ेगी। हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्यसभा की स्टैंडिंग कमेटी को इस संबंध में यह दीर्घकालिक समाधान सुझाया है। केंद्र से जंगलों की आग से निपटने के लिए पर्याप्त सहायता की भी मांग की गई है। इस संबंध में मुख्य सचिव केके पंत, प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन) संजय सूद और वन संरक्षण एवं वनाग्नि नियंत्रण अधिकारी मृत्युंजय माधव ने स्टैंडिंग कमेटी के समक्ष अपनी प्रस्तुति दी।

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विज्ञान, प्रौद्योगिकी, वन एवं जलवायु परिवर्तन पर गठित राज्यसभा की इस कमेटी की सभापति डॉ. मेधा कुलकर्णी हैं। प्रदेश में 9 जून 2026 तक जंगल की आग की 410 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन घटनाओं से 4,741 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। राज्य को करीब 1.41 करोड़ रुपये का अनुमानित नुकसान हुआ है। राज्य के कुल वन क्षेत्र का 17.86 प्रतिशत हिस्सा चीड़ वनों का है। ये वन मार्च से जून के दौरान सबसे अधिक आग की चपेट में आते हैं। सर्दियों में भी शुष्क मौसम के कारण समशीतोष्ण वनों में आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं।

 

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मंडी, धर्मशाला, नाहन और शिमला जैसे वन मंडल अत्यधिक संवेदनशील माने जाते हैं। वर्ष 2022-23 में आग की 2,938 घटनाएं दर्ज की गई थीं, जो एक दशक में सर्वाधिक थीं। उस वर्ष 25 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र प्रभावित हुआ था। वहीं, वर्ष 2024-25 में 32 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र प्रभावित होने से सबसे ज्यादा नुकसान दर्ज किया गया। वन विभाग आग पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। कमेटी को बताया कि दीर्घकालिक रणनीति के तहत लैंटाना उन्मूलन पर जोर दिया जा रहा है। इससे ईंधन भार कम होगा और वनों का पुनर्वास संभव होगा। चीड़ वन क्षेत्रों में मिट्टी की नमी बढ़ाने के लिए विशेष उपाय किए जा रहे हैं। चीड़ वनों को चौड़ी पत्ती वाले वनों में बदलने और जैव-विविधीकरण की योजना भी प्रस्तावित है। यह पहल आग की घटनाओं को कम करने में सहायक होगी।

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