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हिमाचल: फर्जी डिग्रियों का रुकेगा खेल, अब हर विद्यार्थी का होगा यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर
Wed, 24 Nov 2021 10:59 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Wed, 24 Nov 2021 10:59 PM IST
सार
शिमला कार्यालय में प्रेस वार्ता में अध्यक्ष मेजर जनरल सेवानिवृत्त अतुल कौशिक ने बताया कि मानव भारती विवि के फर्जी डिग्री मामले से प्रदेश की साख खराब हुई है। अब आयोग ने सभी विद्यार्थियों को यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर देने का फैसला लिया है। जल्द ही आयोग ऑनलाइन मैनेजमेंट सिस्टम शुरू करेगा।
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निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग के अध्यक्ष मेजर जनरल सेवानिवृत्त अतुल कौशिक
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश में फर्जी डिग्रियों का खेल अब नहीं चलेगा। मानव भारती विश्वविद्यालय में सामने आए फर्जी डिग्री मामले के बाद निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग ने सभी निजी विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर जारी करने का फैसला लिया है। इसके लिए आयोग ने सरकार को प्रस्ताव भेजा है। अगले वर्ष से निजी विश्वविद्यालयों में यह व्यवस्था शुरू की जाएगी।
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चालू शैक्षणिक सत्र के लिए आयोग ने सभी निजी विश्वविद्यालयों को पत्र जारी कर दीक्षांत समारोह करने से पहले डिग्रियों का सत्यापन आयोग से करवाना अनिवार्य कर दिया है। बुधवार को आयोग के शिमला कार्यालय में प्रेस वार्ता में अध्यक्ष मेजर जनरल सेवानिवृत्त अतुल कौशिक ने बताया कि मानव भारती विवि के फर्जी डिग्री मामले से प्रदेश की साख खराब हुई है। अब आयोग ने सभी विद्यार्थियों को यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर देने का फैसला लिया है।
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जल्द ही आयोग ऑनलाइन मैनेजमेंट सिस्टम शुरू करेगा। इसके लिए भारत सरकार की एक कंपनी को चुना गया है। इस सिस्टम के जरिये निजी विश्वविद्यालयों की हर गतिविधि पर आयोग की नजर रहेगी। दाखिलों, हाजिरी, डिग्रियों, शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता, आधारभूत ढांचे से जुड़ी जानकारी पोर्टल पर रहेगी। प्रदेश के 16 में से छह निजी विश्वविद्यालय नैक से मान्यता प्राप्त हैं। तीन विवि जल्द ही नैक की मान्यता प्राप्त करने वाले हैं।
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कई निजी विश्वविद्यालयों ने हटाए अयोग्य शिक्षक
यूजीसी के नियमों को पूरा नहीं करने वाले अयोग्य शिक्षकों को कई निजी विश्वविद्यालयों ने नौकरी से निकाल दिया है। कुछ विश्वविद्यालयों ने इन शिक्षकों को योग्यता पूरी करने के लिए कुछ समय की मोहलत दी है। नए शैक्षणिक सत्र से सभी निजी विश्वविद्यालयों में सिर्फ योग्य शिक्षक ही सेवाएं देंगे। आयोग ने बीते दिनों की गई जांच में 35 फीसदी शिक्षकों को अयोग्य करार देते हुए संबंधित विश्वविद्यालयों को इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र जारी किया था।