तैयारी: शिमला में बनेगा नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो का कार्यालय, विदेश भागे नशा तस्करों की सूची मांगी
एनसीबी चंडीगढ़ और अमृतसर के जोनल डायरेक्टर अमनजीत सिंह ने बताया कि जोनल डायरेक्टर की अगुवाई में पूरी टीम शिमला से नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो का काम देखेगी। उन्होंने बताया कि हिमाचल से विदेश भागे भगोड़े नशा तस्करों की सूची सरकार से मांगी गई है, ताकि इन्हें वापस लाया जा सके।
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नशा मुक्त भारत-2029 के रोडमैप के तहत हिमाचल में नशा तस्करी पर कार्रवाई के साथ रोकथाम, उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था मजबूत होगी। दिसंबर 2026 तक शिमला में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो का जोनल कार्यालय स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। एनसीबी चंडीगढ़ और अमृतसर के जोनल डायरेक्टर अमनजीत सिंह ने बताया कि जोनल डायरेक्टर की अगुवाई में पूरी टीम शिमला से नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो का काम देखेगी। उन्होंने बताया कि हिमाचल से विदेश भागे भगोड़े नशा तस्करों की सूची सरकार से मांगी गई है, ताकि इन्हें वापस लाया जा सके। नशा तस्करी के मामलों के त्वरित निपटारे के लिए सभी प्रदेशों में फास्ट ट्रैक कोर्ट भी बनाए जा रहे हैं।
मार्च 2027 तक सभी स्कूल-कॉलेजों में ड्रग फ्री कैंपस फ्रेमवर्क लागू करने का लक्ष्य है। इसके तहत शिक्षण संस्थानों के आसपास 500 मीटर का सुरक्षित क्षेत्र विकसित किया जाएगा। 170 केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों के 10 लाख से अधिक विद्यार्थियों की प्रिवेंटिव स्क्रीनिंग भी होगी। एनसीसी, एनएसएस और माय भारत के जरिये एक लाख नशा-मुक्ति मित्र तैयार किए जाएंगे। विजन 2026-29 में 35 से अधिक मंत्रालयों और एजेंसियों के परामर्श से तैयार रोडमैप को 26 जून को 10वीं शीर्ष स्तरीय एनसीओआरडी बैठक में जारी किया गया। इसमें चार स्तंभ, 25 कॉम्पोनेंट और 200 से अधिक एक्शन प्वाइंट हैं। राज्य पुलिस, एएनटीएफ और जिला पुलिस को किंगपिन डोजियर, बैकवर्ड-फॉरवर्ड लिंक, वित्तीय जांच और जेल नेटवर्क पर कार्रवाई करनी होगी। 2029 तक 100 अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क ध्वस्त करने और 100 भगोड़ों की वापसी का राष्ट्रीय लक्ष्य है। दिसंबर 2027 तक 100 बड़े कार्टेल मामलों में वित्तीय जांच होगी।
प्रीकर्सर और सिंथेटिक ड्रग्स पर भी निगरानी बढ़ेगी
प्रीकर्सर और सिंथेटिक ड्रग्स पर भी निगरानी बढ़ेगी। 2026 में 75 गुप्त लैब ध्वस्त करने और मार्च 2027 तक प्रीकर्सर सप्लाई चेन की एंड-टू-एंड विजिबिलिटी का लक्ष्य है। इसके लिए पीआरईपी पोर्टल, एचएसएन कोड, जीएसटीएन, सीबीएन-आईसीईजीएटीई एकीकरण, डायनेमिक शेड्यूलिंग और केवाईसी व्यवस्था होगी। डार्कनेट, क्रिप्टो सेल और अवैध खेती पर भी कार्रवाई होगी। जन-जागरूकता की पहुंच 20 करोड़ से बढ़ाकर 2029 तक 50 करोड़ करने, 272 संवेदनशील जिलों में खेल आधारित हस्तक्षेप और हर जिले में पांच प्रमुख कार्यक्रम चलाने का लक्ष्य है। 16 लाख परिवारों और 2.1 लाख हाई-रिस्क यूजर्स का राष्ट्रीय अध्ययन प्रस्तावित है। उपचार के लिए डी-एडिक्शन सेंटर 334 से बढ़ाकर मार्च 2029 तक 1,751 किए जाएंगे। 329 जेलों में नशा-मुक्ति सुविधाएं और 10,000 सेवा प्रदाताओं की क्षमता बढ़ाई जाएगी। हर राज्य में बच्चों और महिलाओं के लिए विशेष नशा मुक्ति सुविधा और एक मेडिकल कॉलेज में संबंधित विभाग विकसित किया जाएगा।