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कच्छयारी से रानीताल फोरलेन का काम ठप, कंपनी ने मांगी एक्सटेंशन

Wed, 23 Jun 2021 01:36 PM IST
अरविन्द ठाकुर प्रवीण कुमार, अमर उजाला नेटवर्क, हमीरपुर
प्रवीण कुमार, अमर उजाला नेटवर्क, हमीरपुर Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Wed, 23 Jun 2021 01:36 PM IST
सार

कोरोना की दूसरी लहर का तर्क देते हुए कंपनी ने अब नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पास टाइम एक्सटेंशन के लिए आवेदन कर दिया है। एनएचएआई ने कंपनी को अप्रैल माह में टेंडर अवार्ड किया था। 

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Himachal News: shimla matour four lane fifth phase work yet not started
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोविड-19 ने हिमाचल प्रदेश के कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर अपना प्रभाव डाला है। बहुप्रतिक्षित फोरलेन प्रोजेक्ट भी कोविड-19 से अछूता नहीं रहा। शिमला से कांगड़ा के मटौर तक प्रस्तावित फोरलेन के पांचवें पैकेज (कच्छयारी-रानीताल) का टेंडर अवार्ड होने के दो माह बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। अब बरसात का मौसम आ रहा है। जिससे इस प्रोजेक्ट के निर्माण में भू-स्खलन समेत अन्य कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

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बाणगंगा से मटौर को कांगड़ा सुरंग के समीप पहाड़ी से एक नई सुरंग के जरिये जोड़ा जाएगा। इससे छह किलोमीटर की दूरी कम होगी। बरसात के मौसम में पहाड़ी की कटिंग भी मुश्किल है। कोरोना की दूसरी लहर का तर्क देते हुए कंपनी ने अब नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पास टाइम एक्सटेंशन के लिए आवेदन कर दिया है। एनएचएआई ने कंपनी को अप्रैल माह में टेंडर अवार्ड किया था।
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टेंडर शर्तों के मुताबिक संबंधित कंपनी को ढाई साल के भीतर कच्छयारी से रानीताल के बीच 18 किलोमीटर लंबे फोरलेन का कार्य पूरा करना है। जबकि रानीताल से ज्वालामुखी तक भूमि अधिग्रहण का कार्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। मटौर से शिमला तक प्रस्तावित दस हजार करोड़ के फोरलेन प्रोजेक्ट की घोषणा केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने वर्ष 2016 में अपने हमीरपुर दौरे के दौरान की थी। अनुमानित लागत 10 हजार करोड़ में से पांच हजार करोड़ रुपये सिविल वर्क, जबकि शेष पांच हजार भूमि व भवन अधिग्रहण पर खर्च होने हैं।
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221 किलोमीटर लंबे एनएच के फोरलेन सर्वें के मुताबिक दूरी घटकर 180 किलोमीटर हो जाएगी। जबकि फोरलेन की चौड़ाई 45 मीटर होगी। मुख्य सरफेस 22.50 मीटर होगा। लेकिन पिछले पांच साल से 180 किलोमीटर में से अभी तक एक किलोमीटर भी नहीं बन पाया है। निर्माण कार्य में देरी के कारण इसकी लागत भी बढ़ने वाली है।


कंपनी को अप्रैल माह में पांचवें पैकेज के अंतर्गत रानीताल से कच्छयारी का टेंडर अवार्ड हो चुका है, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर से विकास कार्य प्रभावित हुए हैं। संबंधित कंपनी ने एक्सटेंशन के लिए आवेदन किया है। जबकि रानीताल से ज्वालामुखी तक अभी तक भूमि अधिग्रहण का कार्य चल रहा है। - योगेश राउत, परियोजना निदेशक, एनएचएआई हमीरपुर।

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