{"_id":"6020f1428ebc3e27e9722b2e","slug":"himachal-news-peoples-of-lahaul-spiti-against-hydro-projects-in-district-after-uttarakhand-glacier-burst","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रस्तावित बिजली परियोजनाएं न बनने देने का लिया प्रण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रस्तावित बिजली परियोजनाएं न बनने देने का लिया प्रण
Mon, 08 Feb 2021 01:38 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, रोहतांग (लाहौल-स्पीति)
अमर उजाला नेटवर्क, रोहतांग (लाहौल-स्पीति)
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 08 Feb 2021 01:38 PM IST
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पेक्सेल्स
हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले के गोशाल गांव में हिमधारा पर्यावरण समूह और सेव लाहौल-स्पीति संस्था ने जागरूकता शिविर का आयोजन किया। इसमें ग्रामीणों ने चंद्रभागा घाटी में प्रस्तावित जल विद्युत परियोजनाओं को नहीं बनने देने का प्रण लिया है। गोशाल पंचायत के पूर्व प्रधान मेघ सिंह ने कहा कि लाहौल की हिमालय घाटी ग्लेशियर टूटने से सबसे ज्यादा प्रभावित रहती है।
विज्ञापन
लेकिन सरकार इस क्षेत्र में 56 जलविद्युत योजनाएं बनाने की कवायद शुरू कर रही है। इससे पूरी लाहौल घाटी उत्तराखंड की तरह त्रासदी की राह पर चली जाएगी। महिला मंडल गोशाल की सदस्य देकिद ने कहा कि लाहौल में वनों को लंबे समय से बचाया जा रहा है। महिला मंडल ने जंगल से लकड़ी लाने पर भी पाबंदी लगा रखी है। गोशाल पंचायत की प्रधान संगीता राणा ने कहा कि किसी भी सूरत में तांदी परियोजना 104 मेगावाट को अनापत्ति नहीं दी जाएगी।
विज्ञापन
सेव लाहौल-स्पीति के उपाध्यक्ष विक्रम कटोच ने कहा कि लाहौल में विनाशकारी जलविद्युत परियोजनाओं के खिलाफ जन जागरण की मुहिम को मजबूती से आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में जो हुआ, उससे सभी आहत हैं।
विज्ञापन