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भानुपल्ली-बिलासपुर रेल लाइन की जमीन पर पर्यावरण मंत्रालय की 12 आपत्तियां

Mon, 20 Jul 2020 11:01 AM IST
अरविन्द ठाकुर अश्वनी पंडित, अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
अश्वनी पंडित, अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 20 Jul 2020 11:01 AM IST
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HImachal News: Objections of the Ministry of Environment on the land of bhanupali bilaspur railway line
सांकेतिक तस्वीर

सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण भानुपल्ली-बिलासपुर रेलवे लाइन निर्माण के लिए चयनित जमीन पर वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से 12 आपत्तियां लगाई गई हैं। अब 5 आपत्तियों पर वन विभाग, 7 पर यूजर एजेंसी रेलवे विकास निगम को जवाब देना होगा। इस बाबत प्रक्रिया चल रही है और सोमवार को स्वारघाट में सब डिविजनल लेबल कमेटी (अंडर एफआरए) की बैठक बुलाई गई है। अगले हफ्ते तक जवाब वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून को प्रेषित किया जाएगा। 

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सोमवार को एफआरए की बैठक स्वारघाट में चेयरमैन एवं एसडीएम सुभाष गौतम की अध्यक्षता में होगी। एसडीएम सुभाष गौतम ने बताया कि बैठक में वन अधिकार अधिनियम के तहत अनुमति दी जाती है। हालांकि, 13 जुलाई को भी बैठक रखी थी लेकिन नॉन ऑफिशियल मेंबर नहीं पहुंच सके जिसकी वजह से अब सोमवार को बैठक होगी। उल्लेखनीय है कि दूसरे चरण में धरोट से जकातखाना तक चयनित जमीन के एनओसी के लिए केस भेजा गया है।
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इनमें से दो पैच ऐसे हैं जहां घने जंगल हैं। ऐसे में विभाग को अलग से एरिया चिह्नित कर उतनी ही प्लांटेशन भी करनी होगी और पूरी रिपोर्ट तैयार कर प्रेषित करनी होगी। 40 हेक्टेयर तक एफसीए के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून की ओर से अनुमति दी जाती है, जबकि इससे अधिक का एनओसी दिल्ली मंत्रालय से मिलता है। वन विभाग को पांच आपत्तियों की रिपोर्ट प्रेषित करनी है जिसके तहत जहां आपत्तियां लगाई हैं, वहां पर घने जंगल हैं।
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हालांकि सर्वे में फाइनल ट्रैक में बदलाव तो नहीं किया जा सकता लेकिन इतना एरिया अलग से चिह्नित कर प्लांटेशन करनी पड़ेगी। इसके तहत वन विभाग को 97 हेक्टेयर एरिया चिह्नित कर प्लांटेशन करनी होगी। बताया जा रहा है कि टनल के ऊपर के एरिया की वन अधिकार समिति से अनुमति नहीं ली गई है जिसकी वजह से आपत्तियां लगी हैं। जकातखाना व भराड़ी नामक जगहों पर रेलवे के साथ फोरलेन मिल रहा है जिसके चलते भी आपत्तियां लगी हैं।  

दूसरे चरण के सर्वे के तहत रेलवे लाइन निर्माण के लिए चयनित जमीन की फोरेस्ट क्लीयरेंस का केस वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून में सबमिट कराया जा चुका है, लेकिन उस ओर से 12 आपत्तियां लगाई गई हैं। इसमें 5 वन विभाग व 7 पर रेलवे विकास निगम को रिपोर्ट तैयार करनी है। इसे जल्द ही पर्यावरण मंत्रालय को प्रेषित किया जाएगा। - आरएस पटियाल, मुख्य अरण्यपाल, वन वृत्त बिलासपुर


तीसरे चरण के सर्वे में चयनित जमीन का तैयार हो रहा केस
रेलवे लाइन के तीसरे चरण के सर्वेक्षण के तहत चयनित जमीन की फोरेस्ट क्लीयरेंस को लेकर रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। जकातखाना से बिलासपुर तक अधिकतर जमीन सरकारी है, जबकि कुछ निजी भी है। सरकारी जमीन पर पेड़ों की गिनती का कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन निजी भूमि पर पेड़ों की गिनती अभी की जा रही है। 

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