Martyr Pramod Negi: शहीद प्रमोद को हजारों नम आंखों ने दी अंतिम विदाई, पिता व भाई ने दी मुखाग्नि
सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ हुए अंतिम संस्कार में शहीद की चिता को पिता और भाई ने मुखाग्नि दी। 15 अगस्त, 1997 को जन्मे प्रमोद अविवाहित थे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राजोरी के कंडी जंगल में आतंकियों के बिछाए आईईडी धमाके में शहीद हुए सिरमौर के शिलाई गांव के पैराट्रूपर प्रमोद नेगी (26) को हजारों नम आंखों ने शनिवार को अंतिम विदाई दी। माता तारा देवी और पिता देवेंद्र नेगी ने बेटे को दूल्हे की तरह सजा नोटों का हार पहनाकर, बहन मनीषा ने राखी बांध और सेना में तैनात छोटे भाई नितेश नेगी ने सैल्यूट कर शहीद प्रमोद को अंतिम विदाई दी।
सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ हुए अंतिम संस्कार में शहीद की चिता को पिता और भाई ने मुखाग्नि दी। 15 अगस्त, 1997 को जन्मे प्रमोद अविवाहित थे। हवाई मार्ग से शहीद प्रमोद की पार्थिव देह उत्तराखंड के शहीद रूचिन सिंह के साथ शनिवार दोपहर देहरादून पहुंची थी।
इसके बाद देहरादून से सड़क मार्ग से होते हुए जैसे ही तिरंगे में लिपटी प्रमोद की पार्थिव देह शाम 5:00 बजे शिलाई पहुंची, तो समूचे गिरिपार इलाके में चीखोपुकार मच गई। शाम 6:45 बजे के आसपास वीर सपूत मां भारती की गोद में समा गया। पुलिस व सेना की टुकड़ियों ने शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया।
29 घंटों से माता-पिता ने शहीद बेटे के इंतजार में नहीं झपकीं पलकें
शहीद बेटे प्रमोद नेगी के इंतजार में पिछले 29 घंटे से माता तारा देवी और पिता देवेंद्र नेगी ने पलकें भी नहीं झपकंी थी। घर पर माता-पिता और बहन मनीषा नेगी के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। वहीं सेना में तैनात छोटे भाई जवान नितेश नेगी शुक्रवार से ही पार्थिव देह से लिपट-लिपटकर रो रहे थे। शनिवार को जैसे ही घर से प्रमोद अनंत यात्रा के लिए निकले तो सड़क किनारे राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के छात्रों ने हाथों में तिरंगा लेकर शहीद को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
वहीं पहाड़ियोंं पर बैठे सैकड़ों लोग शहादत पर चर्चा करते रहे। राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि के दौरान हजारों लोगों की आंखें नम थीं। शनिवार को शहीद के सम्मान में शिलाई बाजार भी बंद रखा गया। शहीद की शहादत पर समूचे गिरिपार में शोक की लहर तो है, लेकिन इलाके के लाखों ग्रामीणों का सीना फख्र से भी चौड़ा हो गया है।
समूची शिलाई घाटी प्रमोद नेगी अमर रहे के नारों से गूंज उठी। उधर, शहीद की माता तारा देवी का कहना था कि प्रमोद अकसर सेना में जाने की जिद करता था। वे कहती थी कि तुम टीचर बनों, लेकिन बेटे की जिद के आगे मां ने भी घुटने टेक दिए। महज 18 साल की उम्र में प्रमोद नेगी भारतीय सेना की 9 पैरा रेजिमेंट का हिस्सा बन गए।