फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal News: IIT Mandi research on Alzheimer's disease

आईआईटी मंडी: अब अल्जाइमर रोग को समझना होगा आसान, दवा अनुसंधान में मिलेगी मदद

Mon, 22 Nov 2021 07:55 PM IST
अरविन्द ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 22 Nov 2021 07:55 PM IST
सार

अल्जाइमर रोग दुनियाभर में तेजी से बढ़ते न्यूरोलॉजिकल विकारों में से एक है। इसे डेमेंशिया का सबसे सामान्य प्रकार भी माना जाता है। आंकड़ों के मुताबिक अकेले अमेरिका में हर साल इस रोग के 5 मिलियन (50 लाख) मामले सामने आते हैं।

विज्ञापन
Himachal News: IIT Mandi research on Alzheimer's disease
अल्जाइमर में भूलने की बीमारी - फोटो : istock

विस्तार

भूलने के लाइलाज अल्जाइमर रोग को समझना वैज्ञानिकों के लिए अब आसान होगा और दवा अनुसंधान में भी मदद मिलेगी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी के शोधकर्ताओं ने एक महत्वपूर्ण जैव, आणविक प्रक्रिया का पता लगाया है, जो अल्जाइमर रोग में अकसर दिखने वाले प्रोटीन बनाने में जिम्मेदार होती है।

विज्ञापन


स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रजनीश गिरी के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की टीम शोध विद्वान डॉ. कुंडलिक गढ़वे, तानिया भारद्वाज के साथ कैंब्रिज विश्वविद्यालय इंग्लैंड के प्रो. मिशेल वेंड्रस्कोलो और दक्षिण फ्लोरिडा विश्वविद्यालय अमेरिका के प्रो. व्लादिमीर विस्की की टीम ने यह सफलता पाई है। शोध टीम के निष्कर्ष हाल में सेल रिपोर्ट्स फिजिकल साइंस जर्नल में प्रकाशित किए गए हैं।
विज्ञापन


तेजी से बढ़ रहा रोग
अल्जाइमर रोग दुनियाभर में तेजी से बढ़ते न्यूरोलॉजिकल विकारों में से एक है। इसे डेमेंशिया का सबसे सामान्य प्रकार भी माना जाता है। आंकड़ों के मुताबिक अकेले अमेरिका में हर साल इस रोग के 5 मिलियन (50 लाख) मामले सामने आते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


विशेषज्ञों को आशंका है कि साल 2060 तक इसके सालाना मामलों में लगभग तीन गुना तक वृद्धि हो सकती है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए अल्जाइमर रोग के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 21 सितंबर को वर्ल्ड अल्जाइमर डे मनाया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस रोग के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाकर उन्हें सुरक्षित रहने में मदद की जा सकती है। 

यह हैं लक्षण
- सुरक्षा और जोखिमों की समझ न होना
- समस्याओं में निर्णय लेने में कठिनाई महसूस होना 
- अवसाद, उदासीनता और समाज से दूरी बना लेना 
- चिड़चिड़ापन और सोने की आदतों में बदलाव 
- पहले की तुलना में अधिक बार बात-बात पर परेशान या क्रोधित होना
- उन गतिविधियों में रुचि न लेना जो आमतौर पर आनंद देती हैं

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed