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Himachal News: कर्मचारी 200 रुपये देकर करवा सकेंगे 5 लाख का बीमा, सरकार ने अधिसूचित की योजना
Mon, 02 Dec 2024 11:09 AM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Mon, 02 Dec 2024 11:09 AM IST
सार
राज्य सरकार ने नियमित, अनुबंध, दैनिक वेतनभोगियों और अंशकालिकों के लिए बीमा योजना अधिसूचित की है। इसके लिए पांच साल बाद भी प्रीमियम नहीं बढ़ाया गया है।
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हिमाचल सरकार।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश में 200 रुपये का सालाना प्रीमियम देकर लाखों कर्मचारी 5 लाख का बीमा लाभ ले सकेंगे। राज्य सरकार ने नियमित, अनुबंध, दैनिक वेतनभोगियों और अंशकालिकों के लिए बीमा योजना अधिसूचित की है। इसके लिए पांच साल बाद भी प्रीमियम नहीं बढ़ाया गया है। वर्ष 2020 में यह प्रीमियम 80 से बढ़ाकर 200 रुपये सालाना किया गया था। 2019 में 80 रुपये सालाना प्रीमियम लिया जाता था, मगर उस समय मृत्यु पर 2 लाख और विकलांगता पर एक लाख रुपये बीमा कवर का प्रावधान था। इसके लिए नवंबर महीने की दो तारीख को दिए जा रहे प्रत्येक कर्मचारी के वेतन व मजदूरी से 200 रुपये की कटौती की जाएगी।
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संस्थागत वित्त निदेशक रोहित जम्वाल ने बताया कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए समूह व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना के नवीनीकरण की घोषणा की है। यह योजना कर्मचारियों और उनके परिवारों को आकस्मिक मृत्यु या विकलांगता के मामले में वित्तीय सहायता देती है। राज्य में सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों, विश्वविद्यालयों, स्वायत्त निकायों के सभी नियमित, तदर्थ, अंशकालिक, संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी इस योजना के तहत आएंगे। यह योजना 24 घंटे के लिए कवरेज देती है और इसमें कहीं भी होने वाली दुर्घटनाएं शामिल हैं।
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घर पर, काम पर, यात्रा करते समय या किसी अन्य गतिविधि के दौरान यह दुर्घटनाओं, डूबने, बाढ़, भूस्खलन, सांप के काटने, भूकंप और चक्रवातों के कारण होने वाली मृत्यु को कवर करती है। इसके अतिरिक्त यह दुर्घटनाओं से उत्पन्न होने वाली स्थायी पूर्ण विकलांगता और आंशिक विकलांगता को भी कवर करती है। इसका लाभ यह होगा कि दुर्घटना के कारण मृत्यु पर कर्मचारियों को 5 लाख, स्थायी पूर्ण विकलांगता पर 5 लाख, एक अंग या आंख की हानि पर 2 लाख रुपये मिलेंगे। मृत्यु दावों के लिए एफआईआर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाणपत्र और कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेजों की आवश्यकता होगी। विकलांगता दावों के लिए, उपचार और विकलांगता प्रमाणपत्र होगा। इसका निपटारा विभागाध्यक्ष इसकी पात्रता की पुष्टि करने के बाद करेंगे। मृतक कर्मचारी के नामांकित व्यक्ति या कानूनी उत्तराधिकारियों को मुआवजा दिया जाएगा।