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फर्जी मार्क्सशीट मामला: साइबर अपराधियों की मदद लेते थे शातिर
Sat, 13 Feb 2021 11:38 AM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sat, 13 Feb 2021 11:38 AM IST
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जांच-सांकेतिक
- फोटो : अमर उजाला
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फर्जी मार्क्सशीट मामले की जांच में जुटी बद्दी पुलिस को छानबीन में पता चला है कि एजेंट मार्क्सशीट के खरीदारों तक पहुंचने के लिए फर्जी वेबसाइटों का सहारा लेते थे। इसके लिए साइबर अपराधियों की मदद भी ली थी। फर्जी मार्क्सशीट और फर्जी वेबसाइट के खेल से एजेंट ग्राहकों को लुभाते और भरोसा दिलाते थे। मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अभी भी कई लोगों की तलाश में जुटी है। हालांकि, पुलिस इस मामले में कुछ भी बोलने से बच रही है।
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सूत्रों का कहना है कि अभी भी इस फर्जीवाड़े के कई अहम किरदारों तक पुलिस नहीं पहुंच पाई है। लगातार कई टीमें अलग-अलग जगह दबिश दे रही हैं। अब तक की जानकारी के अनुसार बद्दी के एक निजी विश्वविद्यालय ने पुलिस के पास फर्जी वेबसाइट बनाए जाने की शिकायत की थी। पुलिस ने इसकी जांच शुरू की और टीमों को आरोपियों तक पहुंचने के लिए लगाया। इस बीच, एक मार्क्सशीट विवि के पास सत्यापन के लिए पहुंची तो उसके फर्जी होने की बात सामने आई।
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विश्वविद्यालय ने हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग और बद्दी पुलिस को इसकी सूचना दी। इसके बाद अब तक की जांच में बद्दी पुलिस को कई अहम जानकारियां मिली हैं। पता चला है कि प्रदेश के तकरीबन सभी निजी विश्वविद्यालयों की फर्जी मार्क्सशीट बनाई जा रही हैं।
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साथ ही कई विश्वविद्यालयों की वेबसाइट बनाकर उनके जरिये मार्क्सशीटों के खरीदारों तक एजेंट पहुंच रहे हैं। कुछ समय पहले पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया है, लेकिन पुलिस अभी भी इस बात की तस्दीक नहीं कर रही है। सूत्रों का कहना है कि बाकी साथियों के मिलने के बाद पुलिस इस पूरे खेल का खुलासा कर सकती है।