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राजपथ पर गूंजेगा चंबा आर की नदिया पार, दिखेगी हिमाचल झांकी

Tue, 24 Jan 2017 03:16 PM IST
अनिल शर्मा/अमर उजाला, चंबा
अनिल शर्मा/अमर उजाला, चंबा Updated Tue, 24 Jan 2017 03:16 PM IST
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himachal jhanki on the eve of republic day on rajpath

नई दिल्ली में आयोजित हो रहे गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर सोमवार को हिमाचल प्रदेश की झांकी प्रदर्शित की जाएगी। गणतंत्र समारोह में प्रदेश की झांकी तीन साल बाद प्रदर्शित हो रही है। इस वर्ष हिमाचल की झांकी में राज्य की अद्भुत पारंपरिक हस्तकला चंबा रूमाल को प्रस्तुत किया जा रहा है। झांकी के अग्रभाग में चंबा रूमाल पर काम करती एक महिला की कसीदाकारी करती सुंदर प्रतिमा दिखाई गई है, जबकि मध्य भाग में कृष्ण एवं राधा को गोपियों के साथ रास-लीला नृत्य करते हुए दर्शाया गया है।

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इसी भाग में चंबा की महिलाएं रूमाल पर कसीदा करते हुए भी दिखाई गई हैं। झांकी के पृष्ठ भाग में चंबा शहर का विशाल सहस्राब्दि द्वार सुशोभित है। चंबा रूमाल हस्तकला 18वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में हिमाचल प्रदेश के चंबा में विकसित पहाड़ी कला का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस पारंपरिक लोक कला में रेशमी धागे से बुने साटन के कपड़े पर दोहरे टांकों (दोरूखा) से दोनों तरफ एक समान कढ़ाई की जाती है।
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चंबा रूमाल पर सामान्यता, रासलीला, अष्ट नायिका और प्राचीन पौराणिक गाथाओं एवं दृश्यों को उकेरा जाता है। चंबा रूमाल के संरक्षण के लिए इसे ‘बौद्धिक संपदा अधिकार समझौता 2007’ के तहत पंजीकृत किया गया है। कला भाषा एवं संस्कृति विभाग की निदेशक शशी ठाकुर ने बताया कि 29 तथा 30 जनवरी, 2017 को ‘भारत पर्व’ पर नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्त्रस्म में सिरमौर
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जिला का सांस्कृतिक दल भी भाग ले रहा है। उन्होंने कहा कि कला, भाषा, संस्कृति विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर के अथक प्रयासों की बदौलत राष्ट्रीय स्तरीय गणतंत्र दिवस के अवसर पर हिमाचल प्रदेश की झांकी का प्रदर्शन सुनिश्चित हो पाया है, जो हिमाचल प्रदेश के लिए गौरव का विषय है।

गुरु नानक देव की बहन नानकी ने बनाया था चंबा रुमाल: नैय्यर

himachal jhanki on the eve of republic day on rajpath

नीडल वंडर के नाम से मशहूर चंबा रुमाल बनाने की कला में राष्ट्रपति अवार्ड विजेता चंबा की कमला नैय्यर (74) गणतंत्र दिवस पर राजपथ में चंबा रुमाल की झांकी में मौजूद रहेंगी। इस दौरान राजपथ में चंबा आर की नदिया पार गाना भी गूंजेगा। इंब्रायडरी कला का यह अद्वितीय नमूना कश्मीर की दोहरी टांका शैली से पूरी तरह से प्रभावित है। जिसके विशुद्ध निर्माण के लिए सिल्क धागे के साथ मलमल के कपड़े का प्रयोग किया जाता है। 

‘अमर उजाला’ से सवाल-जवाब में कमला नैय्यर ने बताया कि सबसे पहले उन्होंने 1963 में कटिंग एंड टेलरिंग का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद चंबा रुमाल विषय में डिप्लोमा करके हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट निगम में वर्ष 1972 से 2001 तक बतौर निरीक्षक सेवाएं दीं। बताया कि चंबा रुमाल के विशुद्ध निर्माण के लिए सिल्क के धागे से मलमल के कपड़े पर कश्मीर की दोहरी टांका इंब्रायडरी चंबा पद्धति में की जाती है।

इस पर विशेष रूप से राधाकृष्ण की रासलीला, रामायण, महाभारत के दृश्यों को आकर्षक रंगों के धागों से उकेरा जाता है, जो दोनों तरफ देखने पर सीधे ही दिखाई देते हैं। यह उत्पाद जियोग्राफिकल इंडिकेशन ऑफ द ट्रेड रिलेटिड इंटएक्च्युल प्रापर्टी राइट एग्रीमेंट 22 जनवरी 2007 के तहत पंजीकरण और संरक्षण प्राप्त है। वहीं, जीआई एक्ट 1999 के तहत भारत सरकार ने इसे पेटेंट और ट्रेडमार्क करार दिया है। आकार के हिसाब से यह रुमाल सौ रुपये से लेकर पच्चीस हजार रुपये में बड़ी आसानी से बिक सकता है। 

गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लेने का अवसर कैसे मिला, के जवाब में नैय्यर ने कहा कि इसका फैसला राज्य भाषा एवं संस्कृति विभाग ने लिया है। जिन्होंने राजपथ में होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लेने के लिए चंबा रुमाल मॉडल का प्रस्ताव भेज रखा था। लिहाजा केंद्र सरकार की समिति से स्वीकृति मिलने के बाद दिल्ली में चंबा रुमाल की झांकी तैयार करने के लिए पिछले दो सप्ताह

से अंतिम तैयारी चल रही है। इस झांकी में राधा कृष्ण और गोपियों की रास लीला को व्यक्त करती जीवंत झांकी दिखाई जाएगी। इसके अलावा झांकी के आकर्षण का मुख्य केंद्र चंबा रुमाल को बनाती महिला होगी। गौर हो कि तीन साल बाद हिमाचल की झांकी को राजपथ में दिखाने की अनुमति मिली है। 

गुरु नानक देव की बहन नानकी ने बनाया था चंबा रुमाल
चंबा रुमाल के निर्माण का जिक्र सबसे पहले गुरु नानक देव की बहन नानकी देवी द्वारा किया माना जाता है। इसे आज भी होशियारपुर के गुरुद्वारे में रखा गया है। इसके अलावा विक्टोरिया अलबर्ट म्यूजियम में चंबा रुमाल का बेशकीमती नमूना रखा गया है, जोकि वर्ष 1883 में राजा गोपाल सिंह ने ब्रिटेन को उपहार के तौर पर दिया था।

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