फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal: Incentive Amount for Unopposed Panchayat in the State Has Increased 125-Fold Over 30 Years

Himachal: प्रदेश में तीस साल में 125 गुना बढ़ी निर्विरोध पंचायतों की प्रोत्साहन राशि, जानें कब हुई थी शुरुआत

Sat, 09 May 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 09 May 2026 05:00 AM IST
सार

प्रदेश में 30 साल में निर्विरोध पंचायतों की प्रोत्साहन राशि 125 गुना बढ़ी है। वर्ष 1995 में पहली बार पंचायत निर्विरोध चुनी गई।

विज्ञापन
Himachal: Incentive Amount for Unopposed Panchayat   in the State Has Increased 125-Fold Over 30 Years
हिमाचल पंचायत चुनाव। - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में 30 साल में निर्विरोध पंचायतों की प्रोत्साहन राशि 125 गुना बढ़ी है। वर्ष 1995 में पहली बार पंचायत निर्विरोध चुनी गई। उस समय मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने जनता से आह्वान कर निर्विरोध पंचायत चुनाव पर 20 हजार प्रोत्साहन राशि की घोषणा की। इसके बाद पंचायतों के निर्विरोध चुनने का सिलसिला जारी रहा। हालांकि वर्ष 2000 में इस राशि को बढ़ाकर एक लाख किया गया। इसके बाद वर्ष 2005 में यह राशि 10 लाख की गई। 2020 में तक यह राशि 10 लाख रही। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस बार पंचायत निर्विरोध चुने जाने पर प्रोत्साहन राशि को बढ़ाकर 25 लाख रुपये किया है।

विज्ञापन

अब तक 638 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि जारी
हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज व्यवस्था के इतिहास में अब तक 735 ग्राम पंचायतें निर्विरोध चुनी गई हैं जबकि जिला परिषद और पंचायत समिति स्तर पर आज तक एक भी बार सहमति नहीं बन पाई। पंचायत चुनावों के दौरान गांवों में आपसी सहमति से प्रतिनिधियों का चयन होने की परंपरा कई क्षेत्रों में कायम रही, लेकिन बड़े स्तर की संस्थाओं में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के चलते यह संभव नहीं हो सका। अब तक सरकार की ओर से ऐसी पंचायतों को करीब 638 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि जारी की जा चुकी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

राशि का उपयोग इन कार्यों में 
राशि का उपयोग पंचायतों में विकास कार्यों, आधारभूत सुविधाओं और सामुदायिक परियोजनाओं पर किया गया। सरकार का मानना रहा है कि निर्विरोध चुनाव से सामाजिक सौहार्द बढ़ता है और चुनावी खर्च तथा विवाद भी कम होते हैं। हिमाचल में वर्ष 1995 में पहली बार राज्य निर्वाचन आयोग के गठन के बाद पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव कराए गए। इससे वहले एमएलए और एमपी इन चुनाव को कराते थे। इससे पहले पंचायत प्रधान और अन्य प्रतिनिधियों का चयन पारंपरिक तरीकों से होता था। वर्ष 1995 में राज्य निर्वाचन आयोग के गठन के बाद चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमबद्धता आई। पंचायत चुनावों में मतदाता सूचियां, नामांकन प्रक्रिया, मतदान केंद्र और मतगणना की आधुनिक व्यवस्था लागू की गई। वर्तमान में पंचायत चुनाव पूरी तरह निर्वाचन आयोग की निगरानी में कराए जाते हैं।इस बार भी पंचायत चुनावों को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। कई पंचायतों में निर्विरोध चुनाव कराने को लेकर प्रयास शुरू हो गए हैं, जबकि अधिकतर स्थानों पर मुकाबले की स्थिति बनने लगी है। पंचायतीराज विभाग के अतिरिक्त निदेशक केवल शर्मा ने बताया कि 1995 में पंचायत निर्विरोध चुने जाने पर 20 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि की जाती थी। समय समय पर यह राशि बढ़ी है।

विज्ञापन

वर्ष      पंचायतें निर्विरोध  प्रोत्साहन राशि
वर्ष 1995 पहली बार चुनाव 20 हजार
2002      107                1.07 करोड़
2005     300              300 करोड़
2010     106              106 करोड़
2015    120              120 करोड़
2020    102             1 02 करोड़

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed