{"_id":"607080a7deff0709d9485fb4","slug":"himachal-high-court-summons-additional-chief-secretary-forest-and-principal-chief-conservator-of-forests","type":"story","status":"publish","title_hn":"आदेश लागू नहीं करवाने पर एसीएस फॉरेस्ट और पीसीसीएफ हाईकोर्ट में तलब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आदेश लागू नहीं करवाने पर एसीएस फॉरेस्ट और पीसीसीएफ हाईकोर्ट में तलब
Fri, 09 Apr 2021 09:59 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Fri, 09 Apr 2021 09:59 PM IST
सार
- वन रेंज कोटी में अवैध कटान मामले में कोर्ट ने दिए थे आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश
- दोनों अधिकारियों को 20 अप्रैल को होना होगा हाईकोर्ट में तलब
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
वन रेंज कोटी में 416 पेड़ों की अवैध कटाई से संबंधित मामले में अपने आदेशों की अनुपालना न करने पर नाराजगी जताते हुए प्रदेश उच्च न्यायालय ने अतिरिक्त मुख्य सचिव वन और प्रधान मुख्य अरण्यपाल शिमला को 20 अप्रैल को हाईकोर्ट में तलब कर लिया है।
विज्ञापन
मुख्य न्यायाधीश एल. नारायण स्वामी और न्यायाधीश अनूप चिटकारा की खंडपीठ ने ये आदेश कोटी रेंज में पेड़ों की कटाई और वन विभाग के उच्च अधिकारियों सहित दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए स्वत: संज्ञान लेने वाली जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान पारित किए।
विज्ञापन
न्यायालय ने 17 मई 2018 को सभी वन अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। जो वन रेंज कोटी यूपीएफ शालोट में 416 पेड़ों की अवैध कटाई के लिए जिम्मेदार थे। कोर्ट ने उन सभी वन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई आरंभ करने के लिए भी आदेश जारी किए थे जो उस क्षेत्र में पिछले 3-4 वर्षों में 416 पेड़ों की कटाई की अनुमति देने के लिए जिम्मेदार थे।
विज्ञापन
हिमाचल प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को आदेशों की अनुपालना करने और दो सप्ताह की अवधि में हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था। न्यायालय ने पेड़ काटने के आरोपी भूप राम को न्यायालय की रजिस्ट्री में 3 लाख 68 हजार 233 रुपये जमा करने का निर्देश दिया था। न्यायालय ने आगे कहा कि मुख्य सचिव और उप पुलिस अधीक्षक शहर शिमला के हलफनामों से स्पष्ट है कि आरोप केवल तीन कर्मचारियों, जिनमें एक बीट गार्ड और दो ब्लॉक कर्मचारियों के खिलाफ लगाए गए थे। जिनमें से एक सेवानिवृत्त हो गया हैं। न्यायालय ने कहा कि उत्तरदाताओं ने अदालत की ओर से पारित निर्देशों की अनुपालना नहीं की है।
समय-समय पर आदेशों की अनुपालना में उत्तरदाताओं की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। सरकार ने कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूरी की है और उन अधिकारियों के खिलाफ कोई दायित्व तय नहीं किया गया है जो उच्च पदों पर आसीन हैं। न्यायालय ने प्रधान मुख्य अरण्यपाल शिमला को एक शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया था।
जिसमें यह बताया जाना था कि किस आधार पर निचले स्तर के कर्मचारियों को पेड़ों की कटाई की अनुमति देने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। न्यायालय ने अतिरिक्त महाधिवक्ता को एक हलफनामा दायर करने का भी निर्देश दिया जिसमें एफआईआर की स्थिति, जांच रिपोर्ट और पेड़ों, पौधों की स्थिति उल्लेख हो जो कि अवैध रूप से काटे गए थे। कोर्ट ने भूप राम को सुनवाई की अगली तारीख पर कोर्ट के समक्ष उपस्थित रहने का भी निर्देश दिया।