इस राशि की फिजूलखर्ची पर हाईकोर्ट ने दो सप्ताह के भीतर मांगी रिपोर्ट
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हिमाचल के शक्तिपीठों के चढ़ावे की राशि की फिजूलखर्ची संबंधी एक याचिका को स्वीकार कर हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। सरकार को दो हफ्ते में रिपोर्ट देकर स्थिति स्पष्ट करनी होगी। अदालत ने इसी मामले में शक्तिपीठों समेत प्रदेश के तमाम प्रमुख मंदिरों के चढ़ावे संबंधी ब्योरा मांगा था। सभी जिला उपायुक्त इस बाबत अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंप चुके हैं। अब सरकार को दो हफ्ते में रिपोर्ट सहित अपना पक्ष रखना होगा।
शक्तिपीठों के चढ़ावे की राशि के दुरुपयोग का आरोप लगाकर हिंदू जागरण मंच के प्रदेशाध्यक्ष एवं पूर्व एडीजीपी केसी सडियाल ने याचिका दायर की थी। याचिका में उन्होंने चढ़ावे के दुरुपयोग को रोकने और अधिनियम 1984 का सख्ती से पालन करवाने की मांग की है। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और अजय मोहन गोयल की पीठ ने मुख्य सचिव, भाषा एवं संस्कृति विभाग के प्रधान सचिव और सभी जिलों के जिलाधीशों से रिपोर्ट मांगी।
मंदिर ट्रस्ट के आयुक्त संबंधित जिले के जिलाधीश और एसडीएम मंदिर ट्रस्ट के चेयरमैन होते हैं। सभी उपायुक्तों ने कोर्ट में रिपोर्ट सौंप दी है। अब सरकार को भी रिपोर्ट के लिए दो हफ्ते मोहलत दी गई है। हाईकोर्ट ने 29 अगस्त की सुनवाई में इस संबंध में निर्देश जारी किए थे। केसी सडियाल का आरोप है कि मंदिर ट्रस्ट के खजाने से लग्जरी गाड़ियां खरीदी जा रही हैं। मंदिर अधिकारी सैर-सपाटे कर रहे हैं, जबकि श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
यह है एक्ट 1984 के नियम
सरकार ने 6 अगस्त, 1984 को हिमाचल प्रदेश हिंदू पब्लिक रिलीजियस इंस्टीट्यूशंस एंड चैरिटेबल इंडोवमेंट्स एक्ट बनाया था। अधिनियम 1984 की धारा 17 के तहत मंदिर चढ़ावा केवल मंदिरों में स्वच्छ पेयजल, शौचालय, श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए सराय, पार्किंग, पुजारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों और श्रद्धालुओं को अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने पर खर्चा जा सकेगा।
इसके अलावा मंदिर क्षेत्र के तहत छोटे मंदिरों के जीर्णोद्धार और रोजाना पूजा-अर्चना कार्यों, वेदों, गीता, रामायण आदि धार्मिक ग्रंथों समेत धार्मिक पुस्तकालयों और शिक्षण संस्थानों पर खर्च किया जा सकता है।
प्रदेश के मंदिरों से दस साल में 3.61 अरब का राजस्व
पूर्व एडीजीपी ने अपनी अर्जी में कहा है कि दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर, जेएंडके में माता वैष्णोदेवी, आंध्रप्रदेश के बालाजी और तिरुपति समेत देश भर के अन्य मंदिरों में श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।
हिमाचल में बज्रेश्वरी माता मंदिर कांगड़ा, चामुंडा माता, ज्वालाजी माता मंदिर, चिंतपूर्णी माता, नयनादेवी मंदिर, हणोगी माता मंदिर, तारादेवी माता, भीमाकाली, श्री त्रिलोकीनाथ, शूलिनी माता, सिद्धपीठ बाबा बालक नाथ आदि समेत राज्य के प्रसिद्ध 36 मंदिरों में श्रद्धालुओं को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
अपील में कहा गया है कि प्रदेश के करीब 12 प्रसिद्ध शक्ति एवं सिद्धपीठों से पिछले दस वर्षों से सरकार को 3 अरब, 61 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है।