हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने नौ साल में निपटाए 54 हजार केस
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उत्तर भारत के तेजतर्रार जजों में गिने जाने वाले न्यायाधीश राजीव शर्मा ने हिमाचल हाईकोर्ट में अपने 9 वर्षों के कार्यकाल में 53 हजार 900 मामलों का निपटारा किया। जनहित और कर्मचारियों की सेवाओं से जुड़े कई मामलों में उन्होंने ऐतिहासिक फैसले दिए हैं। कानून की अवहेलना करने वाले उच्च अधिकारियों को जमकर लताड़ लगाई।
न्यायाधीश राजीव शर्मा ने प्रदेश में बलि प्रथा पर रोक लगाई। पंचायत स्तर पर गौशालाएं बनाने के आदेश दिए। वन भूमि से अवैध कब्जों को हटाने के लिए सख्त आदेश दिए। अवैध कब्जाधारियों पर नकेल कसने को केंद्र सरकार की एजेंसी ईडी को कार्रवाई करने के लिए कहा।
प्रदेश में प्लास्टिक बैन करने और मनाली में स्की विलेज पर रोक लगाने के आदेश भी इन्होंने ही दिए। करंट लगने से अपंग हुए बच्चे को एक करोड़ 25 लाख का मुआवजा दिलवाया। न्यायाधीश राजीव शर्मा ने जनजातीय महिलाओं को उनकी पैतृक संपत्ति में हक दिलाने में महत्वपूर्ण आदेश पारित किए।
रेप पीड़िता के हक में दिया था बड़ा फैसला
नशाखोरी पर रोक लगाने के उद्देश्य से प्रदेश में ड्रग माफियाओं की संपत्तियों को जब्त करने व उनके खिलाफ कार्यवाई ईडी को सौंपने के आदेश भी इनकी खंडपीठ से जारी हुए। रेप पीड़िता को प्रतिमाह 10 हजार रुपये देने दिलाए गए। विद्या उपासकों को पेंशन के दायरे में लाया गया। अनुबंध पर कार्य करने वाले कर्मचारियों का अनुबंध वाला समय पेंशन के लिए गिने जाने का फैसला सुनाया।
पुलिस कर्मियों की ड्यूटी को अधिकतम 8 घंटे प्रतिदिन करने और हर सप्ताह एक छुट्टी निर्धारित करने के आदेश पारित किए। केंद्रीय कर्मचारियों को एक ही हेल्थ स्कीम के तहत लाने के आदेश भी न्यायाधीश राजीव शर्मा ने दिए। अधिवक्ता के तौर पर काम करते हुए राजीव शर्मा ने अनेक जनहित याचिकाएं दायर की थीं। प्रदेश की जनता को कई महत्वपूर्ण मामलों में इन्होंने राहत दिलाई है।
हिमाचल हाईकोर्ट में 1982 में शुरू की प्रेक्टिस
न्यायाधीश राजीव शर्मा ने साल 1982 में हिमाचल हाईकोर्ट में प्रेक्टिस शुरू की। बीस साल बाद वह सीनियर एडवोकेट बन गए। साल 2007 में हिमाचल हाईकोर्ट के जज बने।
न्यायाधीश राजीव शर्मा का तबादला उत्तराखंड के नैनीताल स्थित हाईकोर्ट में बतौर वरिष्ठ न्यायाधीश हुआ है। राजीव शर्मा 26 सितंबर को नैनीताल में पद एवं गोपनीयता की शपथ लेंगे। शनिवार को न्यायाधीश राजीव शर्मा शिमला से रवाना होंगे।
विदाई पार्टी में भावुक हुए न्यायाधीश राजीव शर्मा
हिमाचल हाईकोर्ट से नैनीताल हाईकोर्ट को स्थानांतरित हुए न्यायाधीश राजीव शर्मा शुक्रवार को शिमला हाईकोर्ट में विदाई पार्टी के दौरान भावुक हो उठे। उन्होंने हिमाचल हाईकोर्ट में वकालत से लेकर जज के सफर को याद किया। इस दौरान कोर्ट कर्मचारियों से पहाड़ी बोली में बात करते हुए कहा अच्छा बै फिर मिलेंगे। न्यायाधीश राजीव शर्मा के उत्तराखंड हाईकोर्ट के लिए स्थानांतरण के अवसर पर हाईकोर्ट में फुल कोर्ट एड्रेस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर न्यायाधीश राजीव शर्मा ने कहा उन्होंने हिमाचल प्रदेश के लोगों से बहुत कुछ सीखा और बहुत कुछ पाया।
उन्होंने अपना वकालत का कैरियर तब शुरू किया जब हाईकोर्ट में करीब 30 वकील ही वकालत किया करते थे। आज यहां वकीलों की संख्या 1500 के करीब हो गई है। इतने लंबे समय में हमने काफी बदलाव देखे, पुरानी यादें आज भी ताजा हो जाती हैं। उन्होंने न्यायाधीश दीपक गुप्ता, कुलदीप सिंह कंवर, सुरजीत सिंह, एसएस ठाकुर, पीडी देसाई, भवानी सिंह, एलएस पांटा, वीके गुप्ता को विशेष तौर पर याद किया। अपने परिवार के सहयोग को याद करते हुए न्यायाधीश कुछ क्षणों के लिए भावुक भी हुए।
उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी त्रिशा शर्मा का उनकी इकलौती बेटी त्रिशांजली की परवरिश में बहुत बड़ा योगदान रहा। इसके चलते ही वे न्यायिक क्षेत्र में इतना आगे बढ़ने में कामयाब हो सके। फुल कोर्ट एड्रेस से पहले वकीलों ने ढोल नगाड़ों से न्यायाधीश राजीवशर्मा का स्वागत किया और उनके सम्मान में प्रीति भोज दिया। कार्यक्रम के अंत में सरकार की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया।
अपने अंतिम फैसले में भी उन्होंने वर्ष 1972 से पहले प्रदेश में रह रहे गैर कृषकों को प्रदेश में जमीन खरीदने का हकदार बनाये जाने के आदेश पारित किए।न्यायाधीश राजीव शर्मा के उत्तराखंड जाने से प्रदेश हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश समेत 10 जज रह गए हैं। हाल ही में 4 नए जजों की नियुक्ति से यहां जजों की संख्या 11 हो गई थी। हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सहित जजों की कैडर स्ट्रेंथ 13 है।
राजीव ने आम आदमी तक पहुंचाया न्याय: मंसूर
मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर ने कहा कि न्यायाधीश राजीव शर्मा न केवल उत्तम जज हैं बल्कि एक नेक इंसान भी हैं। इन्होंने ऐतिहासिक फैसले दिए। इन्होंने आम जनता तक न्याय पहुंचाया जिसके चलते इन्हें प्रदेश में सदा याद किया जाएगा। इनके स्थानांतरण से जहां एक तरफ प्रदेश की जनता को नुकसान होगा वहीं उत्तराखंड की जनता लाभान्वित होगी।
यह गणमान्य रहे मौजूद
फुल कोर्ट एड्रेस के दौरान न्यायाधीश संजय करोल, धर्मचंद चौधरी, तरलोक सिंह चौहान, पीएस राणा, सुरेश्वर ठाकुर, विवेक सिंह ठाकुर, अजय मोहन गोयल, संदीप शर्मा और चंद्र भूषण बारोवालिया भी मौजूद रहे। इस मौके पर महाधिवक्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एमए खान ने संबोधित किया। बार काउंसिल की ओर से अजय चंदेल, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता केएस बन्याल और केंद्र सरकार के असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल ने भी संबोधित किया।