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करुणामूलक नौकरी पर हाईकोर्ट का अहम फैसला

Thu, 08 Oct 2015 08:34 AM IST
Updated Thu, 08 Oct 2015 08:34 AM IST
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Himachal high court judgement over job on compassionate ground.

अपने साथी की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे आशीष कुमार और सोनू शर्मा को हाईकोर्ट ने रिहा करने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सोलन के 22 दिसंबर, 2014 के फैसले को पलटते हुए दोनों आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया।

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अभियोजन पक्ष के अनुसार संधोली पंचायत प्रधान ने पुलिस को फोन कर बताया कि ट्रक यूनियन बद्दी के नजदीक पंप हाउस में मृतक अशोक कुमार का शरीर पड़ा है। पुलिस ने मामले की जांच की और आशीष कुमार और सोनू शर्मा से शक के आधार पर पूछताछ की। उनके खिलाफ निचली अदालत में अभियोग चलाया गया।
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फैमिली इनकम में न गिने जाएं पेंशन, अन्य सेवा लाभ

Himachal high court judgement over job on compassionate ground.

करुणामूलक आधार पर नौकरी देने के मामले में हाईकोर्ट ने कहा है कि रिटायरल बेनिफिट, पेंशन और अन्य सेवा लाभों को फैमिली इनकम में नहीं गिना जा सकता। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि करुणामूलक आधार पर नौकरी दिए जाने के लिए जिस दिन आवेदन किया गया हो उसी दिन की पॉलिसी के अनुसार उसका केस कंसीडर किया जाए।

आवेदन करने के बाद संशोधित पॉलिसी के आधार पर ऐसे मामले को कंसीडर नहीं किया जा सकता। कहा कि करुणामूलक आधार पर दी जाने वाली नौकरी को अभ्यर्थी अपने हक के तौर पर नहीं मांग सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह विभाग ने देखना है कि करुणामूलक आधार पर नौकरी देने वाले से क्या काम लेना है, किस पोस्ट पर तैनात करना है। कहा कि करुणामूलक नौकरी के लिए चतुर्थ श्रेणी के अलावा शैक्षणिक योग्यता में छूट नहीं दी जा सकती।

कहा, अभियोजन पक्ष अभियोग साबित करने में रहा है विफल

Himachal high court judgement over job on compassionate ground.

अभियोग साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष ने 25 गवाह पेश किए। निचली अदालत ने दोनों आरोपियों को हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस निर्णय को दोनों प्रार्थियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष प्रार्थियों पर अभियोग साबित करने में विफल रहा है।

अभियोजन पक्ष का केस परिस्थितिय साक्ष्य पर आधारित था, लेकिन अभियोजन पक्ष परिस्थितिय चेन को पूरा करने में नाकाम रही है। अदालत ने प्रार्थियों की अपील को स्वीकार करते हुए निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए दोनों प्रार्थियों को तुरंत रिहा करने के आदेश दिए हैं।

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