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Himachal High Court: धार्मिक स्वतंत्रता कानून को चुनौती देने वाले मामले पर सुनवाई टली

Wed, 17 Aug 2022 10:03 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 17 Aug 2022 10:03 PM IST
सार

हाईकोर्ट में हिमाचल धार्मिक स्वतंत्रता कानून को चुनौती देने वाले मामले पर सुनवाई 10 अक्तूबर तक टल गई है। राज्य सरकार की ओर से जवाब दायर न करने पर मामले पर सुनवाई नहीं हुई। 

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Himachal High Court, Hearing on the matter challenging the religious freedom law adjourned
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में हिमाचल धार्मिक स्वतंत्रता कानून को चुनौती देने वाले मामले पर सुनवाई 10 अक्तूबर तक टल गई है। राज्य सरकार की ओर से जवाब दायर न करने पर मामले पर सुनवाई नहीं हुई।  हिमाचल धार्मिक स्वतंत्रता कानून अधिनियम 2019 के प्रावधानों को अदालत में चुनौती दी गई है। आरोप लगाया गया है कि इस अधिनियम के प्रावधान भारतीय संविधान के विरोधाभासी हैं। ये प्रावधान नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने पुष्टि की है कि अभी तक प्रदेश में इस अधिनियम में एक भी केस दर्ज नहीं हुआ है। ऐसी सूरत में कानूनी प्रावधानों को और सख्त बनाना कानूनी सिद्धांतों के अनुरूप  नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में धर्मांतरण संशोधन विधेयक 2022 को मंजूरी दी जाती है तो उसकी संवैधानिक और कानूनी वैधता को चुनौती दी जाएगी।

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  प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के आखिरी दिन प्रदेश में धर्मांतरण संशोधन विधेयक  को सदन में पारित कर दिया गया।  इसमें अनुसूचित जाति और अन्य आरक्षित वर्ग के लोग अगर धर्म परिवर्तन करते हैं तो उनको किसी तरह का आरक्षण नहीं मिलेगा। इसके अलावा अगर वे धर्म परिवर्तन की बात छिपाकर आरक्षण की सुविधाएं लेते हैं तो ऐसे में उन्हें तीन से पांच साल तक सजा और 50 हजार से एक लाख रुपये तक का जुर्माना होगा। संशोधित कानून के मसौदे के मुताबिक किसी व्यक्ति की ओर से अन्य धर्म में विवाह करने और ऐसे विवाह के समय अपने मूल धर्म को छिपाने की स्थिति में भी तीन से 10 साल तक के कारावास का प्रावधान होगा। कानून में दो लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है।
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प्रश्नपत्र लीक मामले में गिरफ्तार आरोपी की याचिका को खारिज
 प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस भर्ती प्रश्नपत्र लीक मामले में गिरफ्तार आरोपी की याचिका को खारिज कर दिया है। बिहार स्थित नालंदा निवासी रणजीत कुमार ने हाईकोर्ट के समक्ष अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी थी। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने अपने निर्णय में कहा कि प्रश्न पत्र लीक होने के कारण पुलिस भर्ती में बहुत बड़ा घोटाला हुआ है। इसमें कई लोगों का संलिप्त होना पाया गया है। इस मामले में सीआईडी की ओर से दर्ज की गई दूसरी प्राथमिकी वैध है।  याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि आरोपी का पुलिस भर्ती में हुए प्रश्न पत्र लीक मामले में कोई हाथ नहीं है। उसे पुलिस ने बेवजह गिरफ्तार किया है। अदालत से गुहार लगाई गई थी कि आरोपी के लिए सीआईडी की ओर से दर्ज की गई प्राथमिकी को रद्द किया जाए। आरोपी की गिरफ्तारी को अवैध करार दिए जाने की गुहार भी लगाई गई थी। राज्य सरकार ने दलील दी थी कि रणजीत कुमार पुलिस भर्ती प्रश्न पत्र लीक मामले में मुख्य सरगना है। बता दें कि कांगड़ा पुलिस ने पुलिस भर्ती मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ था कि इस मामले के तार प्रदेश के दूसरे जिलों से भी जुड़े हुए हैं। 

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