Himachal: ट्रांसगिरी क्षेत्र को जनजातीय दर्जा देने की सिफारिश पर हिमाचल हाईकोर्ट ने केंद्र से किया जवाब तलब
प्रदेश हाईकोर्ट ने सिरमौर के हाटी समुदाय के ट्रांसगिरी क्षेत्र को जनजातीय क्षेत्र घोषित करने को लेकर प्रदेश सरकार की ओर से की गई सिफारिश के मामले में केंद्र सरकार से जवाबतलब किया है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सिरमौर के हाटी समुदाय के ट्रांसगिरी क्षेत्र को जनजातीय क्षेत्र घोषित करने को लेकर प्रदेश सरकार की ओर से की गई सिफारिश के मामले में केंद्र सरकार से जवाबतलब किया है। मुख्य न्यायाधीश एए सैयद और न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने जनजातीय मंत्रालय को नोटिस जारी कर इसकी पूरी जानकारी तलब की है। मामले पर अगली सुनवाई दो अगस्त को होगी। सिरमौर जिला के ट्रांसगिरी क्षेत्र को जनजातीय क्षेत्र घोषित करने की सिफारिश के निर्णय को चुनौती दी गई है। अनुसूचित जाति संरक्षण समिति जिला सिरमौर ने इस संदर्भ में हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दायर की है। दलील दी गई है कि ट्रांसगिरी क्षेत्र में हाटी समुदाय की जनसंख्या लगभग 40 फीसदी है। समिति की सुनवाई के बगैर ही राज्य सरकार ने ट्रांसगिरी क्षेत्र को जनजातीय क्षेत्र घोषित की सिफारिश की है। इस सिफारिश से संबंधित क्षेत्र में बढ़ती हुई अनुसूचित जाति पर हो रहे अत्याचार को बढ़ावा मिलेगा। ग्राम पंचायत से संबंधित निकायों में अनुसूचित जाति आधारित आरक्षण समाप्त हो जाएगा। हिमाचल प्रदेश सरकार ने राजनीतिक लाभ पाने के लिए यह सिफारिश की गई है। आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार का यह निर्णय संविधान के विपरीत है।
हाईकोर्ट ने बरकरार रखी चरस रखने के दोषी की सजा
वहीं,प्रदेश हाईकोर्ट ने चरस रखने के जुर्म के लिए सुनाई गई सजा बरकरार रखा है। विशेष न्यायाधीश मंडी ने पंजाब निवासी अवतार को दस वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। निचली अदालत ने अवतार को 1.6 किलोग्राम चरस रखने का दोषी पाया था। मंडी पुलिस ने शिल्ली-लारजी में नाका लगाया था। पुलिस ने दोषी को 1.6 किलोग्राम चरस के साथ पकड़ा था। मामले की जांच पूरी होने के बाद दोषी के खिलाफ निचली अदालत में चालान पेश किया गया। अभियोजन पक्ष ने दोषी के खिलाफ अभियोग साबित करने के लिए 13 गवाह पेश किए। निचली अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष दोषी के खिलाफ अभियोग साबित करने में सफल रहा है। निचली अदालत ने दोषी को दस वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस निर्णय को दोषी ने हाईकोर्ट के समक्ष अपील के माध्यम से चुनौती दी। हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े तमाम रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि निचली अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए सुबूतों के आधार पर सही निर्णय लिया है।