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HP High Court: भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामले में हिमाचल हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला, यहां जानें

Tue, 14 Mar 2023 06:27 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 14 Mar 2023 06:27 PM IST
सार

न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर ने कहा कि एक ही उद्देश्य के लिए भूमि का अधिग्रहण करने पर भूमि का एक ही मूल्य तय किया जाएगा। भूमि के वर्गीकरण के आधार पर इसकी बाजार कीमत तय नहीं की जा सकती है। 

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Himachal High Court gave an important decision in the case related to land acquisition
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामले में अहम निर्णय सुनाया है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर ने कहा कि एक ही उद्देश्य के लिए भूमि का अधिग्रहण करने पर भूमि का एक ही मूल्य तय किया जाएगा। भूमि के वर्गीकरण के आधार पर इसकी बाजार कीमत तय नहीं की जा सकती है। अदालत ने हकदारों को 2.85 लाख प्रति बीघा मुआवजा अदा करने के दिए आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने गुजरात अंबुजा सीमेंट फैक्ट्री दाड़लाघाट की ओर से भूमि अधिग्रहण के मामले का निपटारा करते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि जब भूमि का अधिग्रहण एक ही उद्देश्य के लिए किया जाता है तो उस स्थिति में भूमि का वर्गीकरण के आधार पर मूल्य देना प्रासंगिक नहीं है। भूमि अधिग्रहण अधिकारी ने अधिग्रहित भूमि के वर्गीकरण के आधार पर मुआवजा प्रदान किया था, जिसमें बाखल, अव्वल, दोयम, बंजर और कदीम के लिए अलग-अलग बाजार मूल्य तय किया गया था।

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अदालत ने कहा कि भूमि का उचित मूल्य तय करने के लिए बिक्री विलेख के दस्तावेजों का सहारा लिया जाना उचित है। बिक्री विलेख के तहत दोनों पक्ष आपसी बातचीत से भूमि का मूल्य तय करते हैं और निश्चित रूप से भूमि अधिग्रहण अधिकारी को इस तरह के दस्तावेज के आधार पर अधिग्रहित भूमि का मूल्य तय किया जाना चाहिए। अदालत ने पाया कि भू अधिग्रहण अधिकारी ने भूमि के वर्गीकरण के आधार पर 15 हजार से एक लाख रुपये प्रति बीघा कीमत आंकी थी। याचिकाकर्ता ने इस निर्णय को अतिरिक्त जिला न्यायाधीश सोलन की अदालत में चुनौती दी थी। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने भू अधिग्रहण अधिकारी के निर्णय को संशोधित करते हुए 3.60 लाख रुपये प्रति बीघा एकरूप मुआवजा अदा करने के आदेश दिए थे। अंबुजा सीमेंट फैक्ट्री ने इस निर्णय को हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी थी। अदालत ने कहा कि भूमि का उचित मूल्य तय करने के लिए बिक्री विलेख के दस्तावेजों का सहारा लिया जाना उचित है।

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