हिमाचल हाईकोर्ट: छावनी अधिनियम के तहत गठित हर बोर्ड आता है नगर पालिका की श्रेणी में
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने छावनी अधिनियम और नगर पालिका के संबंध में महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। अदालत ने अपने एक निर्णय में कहा है कि छावनी अधिनियम के तहत गठित हर बोर्ड नगर पालिका की श्रेणी में आता है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने छावनी अधिनियम और नगर पालिका के संबंध में महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। अदालत ने अपने एक निर्णय में कहा है कि छावनी अधिनियम के तहत गठित हर बोर्ड नगर पालिका की श्रेणी में आता है। अदालत ने सुबाथू छावनी बोर्ड के गैर-सदस्यों की ओर से पानी की दरों को बढ़ाने के निर्णय को निरस्त कर दिया है। सुबाथू छावनी बोर्ड के सिर्फ दो सदस्यों ने ही पानी की दर आठ रुपये से बढ़ाकर 53.50 रुपये कर दिए थे। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह ने निखिल गुप्ता की याचिका को स्वीकार करते हुए यह निर्णय सुनाया।
अदालत ने कहा कि जब छावनी को संविधान के अनुसार नगर पालिका माना जाता है तो इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता है कि छावनी एक लोकतांत्रिक संस्था है। इस कारण सरकारी अधिकारियों का निर्णय मान्य न होकर छावनी के ऐसे सदस्य जो सरकारी अधिकारी नहीं है, उनका निर्णय अंतिम माना जाता है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि सुबाथू छावनी बोर्ड के सिर्फ दो सदस्यों ने ही 19 जुलाई 2021 को प्रस्ताव पारित कर पानी की दर आठ रुपये से बढ़ाकर 53.50 रुपये कर दी थी। दलील दी गई थी कि छावनी बोर्ड की ओर से लिया गया यह निर्णय संविधान के प्रावधानों के विपरीत है। अदालत के बताया गया था कि पहले यह बोर्ड फरवरी 2021 को निरस्त हो गया था। इसके बाद सिर्फ दो सदस्यों की ओर से ही लिया गया निर्णय न्यायोचित नहीं है।
आनी नहीं बनेगी नगर पंचायत, हाईकोर्ट ने खारिज की पुनर्विचार वाली याचिका
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने निर्णय सुनाया है कि 15 अक्तूबर 2022 को जारी अधिसूचना के तहत आनी नगर पंचायत नहीं बनेगी। अदालत ने गुलाब ठाकुर और अन्यों की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश विरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने यह निर्णय सुनाया उल्लेखनीय है कि गत वर्ष अदालत ने 15 अक्तूबर 2022 को जारी अधिसूचना को रद्द कर दिया था। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया था कि यदि भविष्य में आनी नगर पंचायत का गठन करना हो तो कानून के अनुसार ही किया जाए। अब सरकार ने आनी को नगर पंचायत बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 16 मई 2023 को सरकार की ओर से नगर पंचायत आनी के गठन के लिए कुछ क्षेत्रों को इसमें शामिल करने की अधिसूचना जारी कर दी है।
चेत राम और अन्य प्रार्थियों ने 27 अक्तूबर 2020 को आनी को नगर पंचायत बनाने की अधिसूचना को अदालत में चुनौती दी थी। सरकार ने ग्राम पंचायत बखनाओ से मंझादेश, आनी से फ्रैनली, कराना पंचायत से कराना, कुंगस पंचायत से कुंगस और नमहोग पंचायत से जबान गांव को नगर पंचायत आनी में शामिल करते हुए गठन करने की अधिसूचना जारी की थी आरोप लगाया गया था कि डीसी कुल्लू ने खुद ही बिना किसी प्रस्ताव के आनी को नगर पंचायत बनाने का निर्णय लिया था। गांव वालों की आपत्तियों पर बिना विचार किए ही नगर पंचायत के गठन की अंतिम अधिसूचना भी जारी कर दी गई थी। कोर्ट ने प्रार्थियों की दलीलों से सहमति जताते हुए आनी नगर पंचायत के गठन की अधिसूचना को गैरकानूनी ठहराते हुए रद्द कर दिया था।