हिमाचल हाईकोर्ट: बिजली बोर्ड को देने होंगे मैसर्ज विरगो कंपनी के 56.66 लाख रुपये
प्रदेश हाईकोर्ट ने बिजली बोर्ड को मैसर्ज विरगो कंपनी के 56.66 लाख रुपये लौटाने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश की खंडपीठ ने बिजली बोर्ड की अपील को खारिज कर दिया।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बिजली बोर्ड को मैसर्ज विरगो कंपनी के 56.66 लाख रुपये लौटाने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश की खंडपीठ ने बिजली बोर्ड की अपील को खारिज कर दिया। एकलपीठ के निर्णय पर मुहर लगाते हुए अदालत ने बोर्ड पर लगाए गए जुर्माने की राशि को जमा करवाने की रिपोर्ट तलब की है। अदालत ने बोर्ड से पूछा है कि क्या यह राशि दोषी अधिकारियों से वसूली गई है या नहीं। अदालत ने 11 जनवरी के लिए अनुपालना रिपोर्ट तलब की है। मैसर्ज विरगो एल्युमिनियम कंपनी के 56.66 लाख रुपये कई वर्षों तक इस्तेमाल करने पर हाईकोर्ट ने बिजली बोर्ड के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि इस तरह के उच्च नेतृत्व वाला बिजली बोर्ड का रवैया सिस्टम और उपभोक्ताओं के लिए बहुत खतरनाक है। बोर्ड ने 39,93,370 रुपये और 15,19,540 रुपये की निर्माण सामग्री का वर्षों से उपयोग नहीं किया। इसके लिए बोर्ड कंपनी को हुए नुकसान की भरपाई के लिए उत्तरदायी है। अदालत ने कहा कि बोर्ड की इस लापरवाही के लिए एकलपीठ की ओर से लगाया गया जुर्माना कम है।
जुर्माने की राशि बढ़ाने से पहले यह जानना जरूरी है कि क्या जुर्माने की राशि दोषी अधिकारियों से वसूली गई है या नहीं। मामले के अनुसार कंपनी ने बिजली का लोड बढ़ाने के लिए बिजली बोर्ड के पास 3 जून 2010 को 39,93,370 रुपये की राशि और 15,19,540 रुपये की निर्माण सामग्री जमा करवाई थी। 33 किलोवाट का ट्रांसफार्मर लगाने के लिए यह राशि ली गई थी। बार-बार आवेदन किए जाने के बाद बोर्ड ने 24 जनवरी 2013 को ट्रांसफार्मर लगाने का ठेका दिया। ठेकेदार ने 6 मई 2016 तक भी इस कार्य को पूरा नहीं किया। उसके बाद कंपनी ने हिमाचल प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के समक्ष शिकायत की। आयोग ने कंपनी की शिकायत को स्वीकार करते हुए बोर्ड को आदेश दिए थे कि वह कंपनी के 56.66 लाख रुपये 12 फीसदी के साथ लौटाए। आयोग के इस निर्णय को हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी गई। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने बोर्ड की याचिका को एक लाख रुपये के जुर्माने के साथ खारिज कर दिया था। एकलपीठ के निर्णय को बोर्ड ने खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी थी। खंडपीठ ने बोर्ड की अपील को खारिज करते हुए यह निणय सुनाया।