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HP High Court: पुन: रोजगार पर विचार करे पुलिस विभाग, याचिकाकर्ता ने ली थी ऐच्छिक सेवानिवृत्ति

Mon, 10 Jul 2023 06:04 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 10 Jul 2023 06:04 PM IST
सार

याचिकाकर्ता ने पुलिस विभाग में ही 26 साल नौकरी करने के बाद पारिवारिक स्थिति ठीक न होने के कारण ऐच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी।

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himachal high court directions to police department for Re-employment of appellant
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त कर्मचारी के पुन: रोजगार आवेदन पर विचार करने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को यदि पुन: रोजगार दिया जाता है तो वह सिर्फ काल्पनिक वित्तीय लाभ का हकदार होगा। अदालत ने प्रेम लाल राव की याचिका को स्वीकार करते हुए यह निर्णय सुनाया। अदालत ने कहा कि पुलिस विभाग की ओर से पुन: रोजगार आवेदन को खारिज किए जाने के निर्णय को खारिज कर दिया।

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अदालत ने कहा कि विभाग ने यह आदेश पंजाब पुलिस अधिनियम के प्रावधानों में पारित नहीं किया है। याचिकाकर्ता ने पुलिस विभाग में ही 26 साल नौकरी करने के बाद पारिवारिक स्थिति ठीक न होने के कारण ऐच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी। पारिवारिक हालात ठीक होने पर उसने दोबारा रोजगार के लिए आवेदन किया था। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया था कि उसे 22 दिसंबर 1986 को पुलिस में कांस्टेबल के पद पर तैनाती दी गई थी।
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सेवानिवृत्ति के समय वह एएसआई के पद पर कार्यरत था। पारिवारिक स्थिति ठीक न होने के कारण उसने 30 अप्रैल 2012 को ऐच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। 16 जनवरी 2014 को याचिकाकर्ता ने दोबारा से एएसआई के पद पर नौकरी करने के लिए आवेदन किया। 15 जुलाई 2014 को पुलिस महाप्रमुख ने इस आवेदन को मुख्य सचिव को भेजा और अनुमोदन किया कि याचिकाकर्ता स्वस्थ है और 30 से 55 वर्ष की आयु के बीच है।
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5 अगस्त 2014 को मुख्य सचिव ने खारिज कर दिया था। अदालत ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन करने पर पाया कि याचिकाकर्ता के आवेदन को नियमों के विपरीत खारिज किया गया है। अदालत ने याचिकाकर्ता के आवेदन पर दोबारा निर्णय देने के आदेश दिए है। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के आवेदन पर निर्णय लेते हुए उसकी अधिकतम आयु आड़े नहीं आएगी।


अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता का आवेदन वर्ष 2014 में खारिज कर दिया था और 2014 में ही उसने प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के समक्ष चुनौती दी थी। अदालत ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता को दोबारा रोजगार दिया जाता है तो उसे 5 अगस्त 2014 से वित्तीय लाभ अदा किए जाएं।

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