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Himachal High Court: चिट्टे के आदी को जेल नहीं, चिकित्सा उपचार की जरूरत

Fri, 17 Feb 2023 10:39 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 17 Feb 2023 10:39 AM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने 23 वर्षीय युवक को चिट्टे रखने के मामले में जमानत दे दी है। न्यायाधीश सत्येन वैद्य ने अपने निर्णय में कहा कि चिट्टे के आदी को जेल नहीं बल्कि चिकित्सा उपचार की जरूरत है। 

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Himachal High Court: Chitta addicted need medical treatment, not jail
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 23 वर्षीय युवक को चिट्टे रखने के मामले में जमानत दे दी है। न्यायाधीश सत्येन वैद्य ने अपने निर्णय में कहा कि चिट्टे के आदी को जेल नहीं बल्कि चिकित्सा उपचार की जरूरत है। अदालत ने कहा कि समाज में नशीली दवाओं के दुरुपयोग का खतरा अज्ञात नहीं है। यदि याचिकाकर्ता स्वयं नशीली दवाओं के दुरुपयोग का शिकार है तो उसे चिकित्सा और पुनर्वास की आवश्यकता है न कि बिना दोषसिद्धि के कैद की। मामले के अनुसार 11 अक्तूबर 2022 को पुलिस ने आरोपी विपुल वर्मा और दो अन्य युवकों से 9.08 ग्राम चिट्टा बरामद किया था। पुलिस को गोपनीय सूचना थी कि तीन युवक चिट्टे की तस्करी के लिए धर्मपुर से शिमला वाया बड़ोग जा रहे हैं। पुलिस ने दानोघाट के पास नाका लगाया और रात करीब 11 बजे आरोपियों की गाड़ी रोकी।

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तलाशी के दौरान पुलिस ने गाड़ी से 9.08 ग्राम चिट्टा बरामद किया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ पुलिस थाना सोलन में मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम की धारा 21 और 29 के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस ने याचिकाकर्ता समेत दो अन्य युवकों को हिरासत में लिया। पुलिस जांच में आरोपियों ने बताया कि उन्हें चिट्टे की लत लग गई है। हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की मां ने अदालत को बताया कि उसके बेटा चिट्टे का आदी है। उसका कई बार इंदिरा गांधी मेडिकल अस्पताल में इलाज करवाया गया, लेकिन उससे चिट्टे की आदत नहीं छूटी। अदालत ने पाया कि मामले में सक्षम अदालत के समक्ष चालान पेश कर दिया गया है। अभियोग के विचारण में समय लग सकता है। तब तक आरोपी को हिरासत में रखना उचित नहीं है।

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खनन प्रभावित सोसायटी गयाणा का मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाने रखने के दिए आदेश

सोलन जिले की खनन प्रभावित सोसायटी गयाणा को निलंबित करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। 17 अक्तूबर 2022 को हाईकोर्ट ने अदालत को गुमराह करने पर सोसायटी को निलंबित करने के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट ने पंजीयक सहकारिता विभाग को गयाणा सोसायटी का प्रशासक लगाया था। हाईकोर्ट के इस निर्णय को सोसायटी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। मामले के अनुसार याचिकाकर्ता कपूरा राम और अन्य ने अपने ट्रक अंबुजा सीमेंट कंपनी के साथ कार्य आवंटन करने की मांग की थी।

आरोप लगाया गया था कि कंपनी से सीमेंट ढोने के लिए सोसायटी अपने चहेते के ट्रकों को काम पर लगा रही है। इस शिकायत पर उपमंडलाधिकारी अर्की ने मामले की छानबीन की। जांच में पाया गया कि गयाणा सोसायटी ने कई धांधलियां की हैं। साथ ही अपने कर्तव्यों के निर्वहन करने में कोताही बरती है। आरोप लगाया गया था कि सुनवाई के दौरान कुछ मध्यस्थों ने प्रतिवादी बन सोसायटी पर मनमानी की और चुनिंदा लोगों को कार्य आवंटन के लिए इजाजत दी। हाईकोर्ट ने सोसायटी की कार्यप्रणाली को संदेहास्पद पाते हुए इसे तुरंत निलंबित करने के आदेश जारी किए थे।

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