Himachal: हिमाचल हाईकोर्ट ने रद्द किया 95 करोड़ का मध्यस्थता अवार्ड, जानें क्या है पूरा मामला
प्रदेश हाईकोर्ट ने मध्यस्थ (आर्बिट्रेटर) की ओर से पारित 95 करोड़ रुपये के अवार्ड (निर्णय) को रद्द कर दिया है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मध्यस्थ (आर्बिट्रेटर) की ओर से पारित 95 करोड़ रुपये के अवार्ड (निर्णय) को रद्द कर दिया है। अदालत ने बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड के पक्ष में यह फैसला दिया। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने हिमाचल प्रदेश माइक्रो एंड स्माल एंटरप्राइजेज फैसिलिटेशन काउंसिल (एमएसएमईएफसी) को निर्देश दिया कि वह विवाद के निपटारे के लिए अपने पैनल से एक नया मध्यस्थ नियुक्त करे। अदालत ने मध्यस्थता प्रक्रियाओं में निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करने का भी निर्देश दिया है। दोनों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। खरीदकर्ता ने मध्यस्थ की ओर से पारित 6 अप्रैल 2021 के निर्णय को चुनौती दी थी, जिसमें आपूर्तिकर्ता को 95,00,70,208 रुपये के साथ ब्याज व जीएसटी का भुगतान करने का निर्देश भी दिया गया था।
अदालत ने पाया कि मध्यस्थ ने निर्णय पारित करते समय खरीदार (अपीलकर्ता) की महत्वपूर्ण आपत्तियों, जिनमें क्षेत्राधिकार, परिसीमन और बिहार में चल रही पिछली अदालती कार्यवाही शामिल थी, पर कोई विचार नहीं किया। मध्यस्थ ने केवल आपूर्तिकर्ता के तर्क को ध्यान में रखकर ही निर्णय पारित किया। जो मध्यस्थता और सुलह अधिनियम 1996 की धारा 18 का उल्लंघन है। मध्यस्थ ने दोनों पक्षों को सुनवाई का बराबर मौका नहीं दिया। अदालत ने खरीदार के तर्क को स्वीकार किया कि कोविड-19 महामारी के दौरान मध्यस्थ ने कार्यवाही जल्दबाजी में की और उन्हें 19 मार्च 2021 को उपस्थित होने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।
न्यायालय ने मध्यस्थता अवार्ड की अपील के लिए 75 फीसदी राशि जमा करने की शर्त को भी मौजूदा मामले में अजीबोगरीब बताया। अदालत ने कहा कि 95 करोड़ की 75 फीसदी राशि यानी 72 करोड़ जमा करने से खरीदार मुश्किल में आ जाएगा। यह मामला एक आपूर्तिकर्ता और एक क्रेता के बीच विवाद से जुड़ा था। आपूर्तिकर्ता ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) परिषद के समक्ष 14,87,60,705 रुपये के बकाया चालानों के लिए दावा दायर किया। बाद में उसने 66,50,74,190 रुपये के लिए एक संशोधित दावा प्रस्तुत किया। मध्यस्थ ने एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की रिपोर्ट पर भरोसा करते हुए आपूर्तिकर्ता के बढ़े हुए दावे को सही ठहराया और उसी के अनुसार अवार्ड पारित कर दिया।