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नशे के सौदागरों को फांसी देने का कानून बनाए केंद्र सरकार: हाईकोर्ट

Thu, 18 Aug 2016 12:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Thu, 18 Aug 2016 12:03 AM IST
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Himachal High Court asks centre govt to make death penalty provisions for drug smugglers
हिमाचल हाईकोर्ट

हिमाचल हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि नशीले पदार्थों का उत्पादन करने, रखने, बेचने और तस्करी करने वाले दोषियों को मृत्युदंड देने का प्रावधान बनाने पर तीन महीने में फैसला ले। न्यायाधीश राजीव शर्मा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने केंद्रीय वित्त एवं राजस्व मंत्रालय के सचिवों को आदेश देते हुए कहा कि वे इस तरह के मामलों में न्यूनतम 10 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान भी बनाए।

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कोर्ट ने खेद प्रकट किया कि सरकारों ने मादक पदार्थों के घातक परिणामों को नजरअंदाज कर सजा का प्रावधान बनाया है जबकि ऐसे मामलों में संलिप्त लोग देश के नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए बहुत बड़ी चुनौती हैं। ये लोग राष्ट्र की युवा शक्ति को खोखला व कमजोर बनाने में लगे हैं। यह कारोबार बड़े अपराधियों द्वारा किया जा रहा है।

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कोर्ट ने बनाई सूची, किस अपराध के लिए कितनी सजा

Himachal High Court asks centre govt to make death penalty provisions for drug smugglers

इस तरह के अपराधियों के लिए उनके जुर्म के परिणाम के हिसाब से सजा का प्रावधान बनाना अति आवश्यक है। कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो समाज में अशांति फैल जाएगी। निर्दोष लोग परिवार सहित अपने जीवन से हाथ धो बैठेंगे। समाज की सुरक्षा व उत्थान के लिए देश में कठोर व प्रभावी कानून बनाना सरकार का अहम दायित्व है ताकि कानून के राज का लाभ देश के नागरिकों को मिले।

कोर्ट ने नशीले पदार्थों की मात्रा सहित सूची तैयार की है, जिन्हें मृत्युदंड का प्रावधान बनाने की आवश्यकता बताई है। इस सूची में 10 किलो अफीम, 1 किलो हेरोइन, 1 किलो कोडीन, 1 किलो थैबेंन, 1 किलो मॉर्फिन, 500 ग्राम कोकीन और 20 किलो चरस व ऐसी ही मादक दवाइयां बनाने, रखने और बेचने वालों को शामिल किया गया है।

ठियोग-हाटकोटी-रोहडू रोड पर दूर करो ट्रैफिक की समस्या

Himachal High Court asks centre govt to make death penalty provisions for drug smugglers

प्रदेश हाईकोर्ट ने ठियोग-हाटकोटी-रोहडू नेशनल हाईवे पर लग रहे मौजूदा सेब सीजन के दौरान ट्रैफिक जाम की शिकायतों को देखते हुए सरकार को सख्त आदेश दिए हैं कि वह इस क्षेत्र में सुचारु यातायात व्यवस्था को बनाये रखना सुनिश्चित करे। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि सड़क को चौड़ा करने का कार्य बड़ी धीमी गति से बढ़ रहा है।

निर्मित सड़क की नालियों की व्यवस्था ठीक नहीं है जिस कारण बनी बनाई सड़क को भी नुकसान पहुंच रहा है। ठियोग में नगर परिषद की इमारत को अधिगृहित करने के बावजूद न हटाने से भी कार्य प्रभावित हो रहा है। जगह-जगह ट्रैफिक जाम लग रहा है, जिससे सेब सीजन भी प्रभावित हो रहा है।

मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने इन तथ्यों के दृष्टिगत ठेकेदार को आदेश दिए कि वह नालियों की व्यवस्था को सुधारे ताकि बनी बनाई सड़क को कोई नुकसान न पहुंचे। कोर्ट ने ठेकेदार को सड़क के प्रगति कार्य को देखने के लिये गठित कमेटी की रिपोर्ट पर 22 अगस्त तक स्टेट्स रिपोर्ट दायर करने के आदेश भी दिए।

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22 अगस्त तक रिपोर्ट दायर करने के आदेश

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गौरतलब है कि पूर्व बागवानी मंत्री नरेंद्र बरागटा ने साल 2014 में याचिका दायर कर सड़क के कार्य को शीघ्र पूरा करने बाबत सरकार व ठेकेदार को जरूरी दिशानिर्देश दिए जाने की मांग की थी। इस याचिका पर हाईकोर्ट ने स्वत संज्ञान लिया और समय-समय पर सरकार व ठेकेदार को जरूरी आदेश दिए।

सड़क के कार्य की निगरानी के लिए दो सदस्यीय कमेटी का गठन भी किया। यह कमेटी महीने में दो बार सड़क कार्य की निगरानी कर कोर्ट के समक्ष अपनी रिपोर्ट पेश करती है। रिपोर्ट के अनुसार ठियोग नगर परिषद का भवन जो इस सड़क के मुहाने पर बनाया गया है भी सड़क को चौड़ा करने के कार्य में बाधक बना हुआ है।

सरकार ने कोर्ट को बताया कि यह भवन अधिगृहित किया जा चुका है और इसकी एवज में 28 लाख रुपये स्वीकृत भी किये जा चुके हैं। भवन को एक साथ गिराने की बजाए विभिन्न चरणों में इसे हटा दिया जाएगा। कोर्ट ने मामले की पैरवी करने वाली सभी पार्टियों को 22 अगस्त तक ताजा स्टेटस रिपोर्ट दायर करने के आदेश भी जारी किये। मामले पर सुनवाई 22 अगस्त को होगी।

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