कर्मचारियों के हक में हाईकोर्ट का अहम फैसला
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हिमाचल हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह दो सप्ताह के भीतर शेट्टी कमीशन की सिफारिशों को अमल में लाएं। अदालत ने प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव, प्रधान सचिव वित्त और प्रधान सचिव विधि को अदालती आदेशों के अनुपालना न करने पर अवमानना का नोटिस जारी किया है। अदालत ने सभी प्रतिवादियों को पहली अप्रैल को अदालत के समक्ष पेश होने के आदेश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने हाई कोर्ट ज्यूडिशियल एंप्लाइज की ओर से दायर अवमानना याचिका पर उक्त आदेश पारित किए। ज्ञात रहे कि 3.1.2014 को हाई कोर्ट ने आदेश दिए थे कि प्रदेश की निचली अदालतों के सैकड़ों कर्मचारियों को पहली अप्रैल 2003 से शेट्टी कमीशन के तहत वेतन और भत्ते दिए जाएं।
प्रदेश अधीनस्थ न्यायालय कर्मचारी को किया था निरस्त
अदालत ने प्रदेश सरकार की ओर से बनाए गए हिमाचल प्रदेश अधीनस्थ न्यायालय कर्मचारी (पे अलाउंसिज एंड अदर कंडीशंज ऑफ सर्विस) अधिनियम 2005 को निरस्त कर दिया था। अदालत ने अपने आदेशों में कहा था कि यह अधिनियम शेट्टी कमीशन की सिफारिशों के अनुरूप नहीं है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी सभी राज्यों को शेट्टी कमीशन की सिफारिशों के अनुसार अधीनस्थ न्यायालयों में कार्य कर रहे कर्मचारियों को वेतन और अन्य भत्ते दिए जाने के आदेश पारित किए थे। इन आदेशों में बावजूद प्रदेश सरकार ने अपना अधिनियम बना कर शेट्टी कमीशन की सिफारिशों को दरकिनार कर दिया जो सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का भी उल्लंघन है।