कर्ज लेने की सीमा बढ़ाएगी हिमाचल सरकार, बजट सत्र में पेश होगा बिल
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हिमाचल प्रदेश सरकार कर्ज लेने की अपनी सीमा बढ़ाने जा रही है। इसके लिए हिमाचल प्रदेश राजकोषीय एवं बजट प्रबंध संशोधन विधेयक 2021 सदन में पेश किया जाएगा। वर्तमान अधिनियम में राज्य सकल घरेलू उत्पाद का करीब तीन फीसदी कर्ज लेने की हद तय है। बिल पारित कर इसे पांच फीसदी तक बढ़ाया जा सकता है। राज्य की माली हालत पतली है। कोरोना काल में तो अर्थव्यवस्था पटरी से बाहर होने लगी है। ऐसे में सरकार के पास कर्ज लेकर बजट प्रबंधन करने के अलावा कोई चारा नहीं है। बिल पारित होने के बाद इसके नियमों को केंद्रीय वित्त मंत्रालय की अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। वर्तमान में हिमाचल पर करीब 60 हजार करोड़ का कर्ज है। यह हर साल बढ़ता जा रहा है। इसकी वजह यह है कि सरकार के पास आमदनी के पर्याप्त स्रोत नहीं हैं। चालू वित्त वर्ष का बजट हो या फिर आगामी बजट, इसका प्रबंधन राजस्व घाटा अनुदान, जीएसटी मुआवजा, अन्य केंद्रीय सहायता और कर्ज लेकर ही किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2022-23 के बाद केंद्र से राजस्व घाटा अनुदान चालू वित्तीय वर्ष 2020-21 और आगामी वित्तीय 2021-22 की तुलना में बहुत बहुत कम मिलेगा।
15वें वित्तायोग की सिफारिश के बाद यह हर साल घटता ही जाएगा। इसके अलावा राज्य योजना बोर्ड हाल ही की एक बैठक में इस संबंध में चिंता जता चुका है कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में केंद्र से मिलने वाले जीएसटी मुआवजा का हनीमून पीरियड खत्म होने जा रहा है। यह बंद हो जाएगा तो राज्य को सीधे-सीधे 4000 करोड़ का सालाना झटका लगेगा। ऐसे में आगामी वित्तीय प्रबंधन को देखते हुए जयराम सरकार ने तय किया है कि सरकार को अपने बढ़ते राजकोषीय घाटे को देखते हुए कर्ज की सीमा को बढ़ा देना चाहिए। यह कितना बढ़ाया जाना है, यह तो अभी तय नहीं है, पर सरकार इस सीमा को जीएसडीपी का पांच फीसदी तक भी बढ़ाया जा सकता है। इन दिनों राज्य सचिवा-लय में हिमाचल प्रदेश राजकोषीय एवं बजट प्रबंध संशोधन विधेयक - एफआरबीएम 2021 का प्रारूप तैयार किया जा रहा है। इसके ड्राफ्ट पर मंत्रिमंडल की अगली बैठक में भी चर्चा होगी। इसके बाद इसे बजट सत्र में पेश कर पारित किया जाएगा।