अब कस्टमर्स से धोखधड़ी की तो पढ़ लें क्या होगा
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हिमाचल सरकार ने पैक्ड खाद्य वस्तुओं के माप तोल में गड़बड़ी पर परचून और थोक विक्रेताओं के लिए कंपाउंडिंग फीस कई गुणा बढ़ा दी है। राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश विधिक माप विज्ञान प्रवर्तन संशोधित नियमों को लागू कर दिया है। अधिकतम खुदरा मूल्य से अधिक रेट पर पैक्ड उत्पादों की बिक्री पर प्रशमन शुल्क पहले निर्धारित नहीं था।
इसे अब रिटेलर के लिए प्रति मामला दो हजार और थोक विक्रेता के लिए पांच हजार रुपये कर दिया गया है। चार साल पुराने नियमों में यह संशोधन अलग-अलग श्रेणियों में किया गया है। नियम 36 के उपनियम 2 में डिब्बाबंद वस्तुओं के माप निर्धारित से कम पाए जाने पर पहले प्रशमन शुल्क 2500 रुपये होता था।
दस हजार से पचास हजार तक पेनल्टी
अब इसे परचून विक्रेता के लिए दस हजार रुपये और थोक विक्रेता के लिए पचास हजार रुपये किया गया है। नियम 36 के उप नियम 1 में निर्धारित स्टैंडर्ड वाली वस्तुओं का नॉन स्टैंडर्ड विक्रय करने पर दोनों ही तरह के विक्रेताओं के लिए पहले कंपाउंडिंग फीस 2500 रुपये थी।
अब यह परचून विक्रेताओं पर 5000 और थोक विक्रेताओं पर 25 हजार रुपये की दर से लगाया जाएगा। इन पैक्ड वस्तुओं में घी, बिस्कुट, आटा, चावल आदि भी शामिल हैं। दर्जन, मन, मुट्ठी जैसी अमानक इकाइयों में वस्तुएं बेचने पर पहले एक हजार रुपये शुल्क का प्रावधान था। अब इसे दो हजार और 10 हजार रुपये कर दिया गया है।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग (विधिक माप विज्ञान) नियंत्रक केसी गौड़ ने बताया कि नियमों में संशोधन लागू हो गया है। माप तोल में गड़बड़ी पर पहले खुदरा और थोक विक्रेताओं को एक सा प्रशमन शुल्क लगाया जाता था। अब इसे संशोधित किया गया है। इससे उपभोक्ताओं को लाभ होगा।