पी मित्रा के खिलाफ जांच को हिमाचल सरकार ने दी मंजूरी
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हिमाचल सरकार ने धारा- 118 मामले में पूर्व मुख्य सचिव एवं राज्य चुनाव आयुक्त पी मित्रा को आरोपी मानते हुए उनके खिलाफ जांच के लिए विजिलेंस को मंजूरी दे दी है। सरकार ने यह फैसला विजिलेंस प्रमुख को हटाने के चंद घंटे बाद लिया।
बता दें कि मामले में नाम आने के बाद विजिलेंस ने मित्रा को आरोपी बनाने की सरकार से अनुमति मांगी थी। मंगलवार को स्वीकृति मिलने के बाद अब विजिलेंस ब्यूरो मित्रा से पूछताछ, उनके वायस सैंपल लेने, ब्रेन मैपिंग करवाने के अलावा गिरफ्तारी पर भी फैसला ले सकता है।
ब्रेन मैपिंग संबंधी कोर्ट में पेश अर्जी पर इस दिन होगी सुनवाई
विजिलेंस ने करीब एक महीने पहले प्रदेश सरकार से मित्रा को आरोपी बनाने के लिए मंजूरी मांगी थी। मामला काफी दिन लटका रहा। तीन दिन पहले विजिलेंस के सरकारी वकील ने ब्यूरो के जरिये सरकार को पत्र लिखकर जानकारी दी कि कोर्ट ने सरकार से जांच की मंजूरी न मिलने पर मित्रा के ब्रेन मैपिंग और वायस सैंपल लेने की दरख्वास्त वापस लेने की सलाह दी है।
अमर उजाला ने इस खबर को मंगलवार के अंक में प्रकाशित किया तो मुख्यमंत्री और शीर्ष अधिकारियों ने मंत्रणा के बाद मित्रा मामले में जांच के लिए विजिलेंस को स्वीकृति दे दी। सूत्रों का कहना है कि अब मित्रा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। विजिलेंस की वायस सैंपल और ब्रेन मैपिंग संबंधी कोर्ट में पेश अर्जी पर सुनवाई 7 दिसंबर को होगी।
क्या है मामला
आरोप हैं कि वर्ष 2010-11 में घूस लेकर गैर हिमाचलियों को जमीन दे दी गई। इसमें भ्रष्टाचार के तहत मामला दर्ज किया गया। उस समय धूमल की सरकार थी और पी मित्रा प्रमुख सचिव राजस्व थे। कांग्रेस की सरकार आने से मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
विजिलेंस की क्लोजर रिपोर्ट को सेशन कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया और जयराम सरकार बनते ही नए सिरे से जांच की गई। केंद्र सरकार ने भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 17 ए में संशोधन कर दिया था।
इसके बाद किसी भी सरकारी अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ जांच या कार्रवाई से पहले सरकार से मंजूरी लेना आवश्यक हो गया। इसी की वजह से विजिलेंस ब्यूरो ने प्रदेश सरकार से मित्रा के खिलाफ जांच करने की अनुमति मांगी थी।