कर्ज में डूबी हिमाचल सरकार के विभाग नहीं वसूल रहे टैक्स, कैग रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
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हिमाचल सरकार कर्ज में डूबी हुई है और उसके विभाग बनता टैक्स भी नहीं वसूल रहे हैं। घाटे का रोना रोने वाले परिवहन विभाग ने न तो विशेष पथ कर की राशि वसूली और न साढ़े 16 हजार से अधिक व्यावसायिक वाहनों से सांकेतिक कर एकत्रित किया।
सहायक आबकारी एवं कराधान आयुक्त ने भी शराब के लाइसेंसधारी ठेकेदारों पर अपनी दया दृष्टि बनाए रखी, जिसके चलते करोड़ों का राजस्व नहीं मिला।यह खुलासा नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) की वर्ष 2017-18 की रिपोर्ट से हुआ है।
यह रिपोर्ट विधानसभा के शीत सत्र के दौरान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शनिवार को पेश की। आम तौर पर यह रिपोर्ट बजट सत्र में ही रखी जाती है। कैग रिपोर्ट के अनुसार परिवहन विभाग ने वर्ष 2016-17 के विशेष पथ कर के 23.38 करोड़ रुपये परिवहन निगम और निजी वाहनों से वसूल ही नहीं किए।
वर्ष 2015-16 से 2016-17 के 16,588 व्यावसायिक वाहनों से साढ़े आठ करोड़ रुपये के सांकेतिक कर की न तो परिवहन विभाग ने मांग की और न ही मालिकों ने इसका भुगतान किया
।यह भी खुलासा हुआ है कि सहायक आबकारी एवं कराधान आयुक्त ने 49 लाइसेंसधारियों से 38.90 करोड़ की लाइसेंस फीस वसूलने और शराब की दुकानों को सील करने की कोई कार्रवाई नहीं की।
विभाग ने 156 बिक्री केंद्रों के लाइसेंसधारियों से वर्ष 2016-17 में लाइसेंस फीस/बोतलीकरण फीस/फ्रेंचाइजी फीस का भुगतान विलंब से किए जाने पर 3.77 करोड़ की ब्याज की राशि वसूलने में भी दिलचस्पी नहीं दिखाई।
वन विभाग की सड़ गई 1.18 करोड़ की लकड़ी
कैग रिपोर्ट के अनुसार 2015-16 और 2016-17 के दौरान विभाग ने 225.916 घनमीटर जब्त की इमारती लकड़ी को विभिन्न डिपुओं में रखा, लेकिन इसका कोई निपटान नहीं किया। इसके चलते 1.18 करोड़ रुपये की लकड़ी सड़ गई।
वन विभाग ने 62 इमारती लकड़ी के लाट्स के दोहन का काम राज्य वन निगम को सौंपा, जिनका पट्टावधि के दौरान दोहन नहीं किया गया, जिसके चलते 29.86 लाख की विस्तार फीस न तो विभाग ने मांगी और न ही निगम ने इसका भुगतान किया।