हिमाचल सरकार को सताने लगी चिंता, बुलाई आपात बैठक
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पिछले साढ़े तीन महीने से पर्याप्त बारिश और बर्फबारी न होने से हिमाचल में सूखे जैसे हालात बन गए हैं। ऐसे में सूखे से निपटने के लिए प्रदेश सरकार ने आपात बैठक बुला ली।
प्रधान सचिव राजस्व एवं आपदा प्रबंधन ओंकार शर्मा ने सभी जिलों के उपायुक्तों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सूखे का फीर्ल्ड सर्वे करवा आकस्मिक योजना तैयार करने के निर्देश दिए।
प्रदेश में बरसात के सीजन के बाद से 49 फीसदी कम बारिश हुई है। जनवरी महीने में अभी तक सामान्य से 99 फीसदी कम बारिश रिकार्ड हुई है। किसानों की 50 फीसदी फसलें मुरझा गई हैं।
प्रधान सचिव ने सभी जिलों में वर्षा आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद कहा कि प्रदेश में सूखे के हालात बन गए हैं। लिहाजा संबंधित हितधारकों के सहयोग से जिला स्तर पर आकस्मिक योजना तैयार करें।
प्रधान सचिव ने कहा कि खेती से इतर सूखे का पेयजल क्षेत्र में कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। उन्होंने कहा कि आईपीएच विभाग के पास प्रदेश में 45 पेयजल आपूर्ति परीक्षण प्रयोगशालाएं हैं, जहां नियमित परीक्षण किए जाते हैं।
विभाग ने प्रदेश के सभी जल भंडार टैंकों की सफाई का कार्य सफलता से पूर्ण कर लिया है। सभी डीसी उपमंडल स्तर पर पानी की गुणवत्ता जांच सुनिश्चित करें। पेयजल स्रोतों को दूषित होने से बचाने समेत पीलिया जैसी जनजनित बीमारियों से बचाव के लिए सुपर क्लोरीनेशन प्रक्रिया आरंभ की जाए।
इन फसलों पर मौसम की मार
इस अवसर पर विशेष सचिव राजस्व और आपदा प्रबंधन डीसी राणा, निदेशक भारतीय मौसम विभाग मनमोहन सिंह, मुख्य अभियंता सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग, बागवानी तथा कृषि के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।
इन फसलों पर मौसम की मार
गेहूं, जौ, लहसुन, प्याज, मटर, सरसों, आलू, टमाटर और मूली की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। अधिकतर जिलों में 50 फीसदी फसल प्रभावित हुई है। करसोग में 4000 हेक्टेयर भूमि में बीजी मटर की फसल तबाह हो गई है। यहां करोड़ों के मटर का उत्पादन होता है। सेब, बादाम, अनार और नाशपाती की फसल पर भी सूखे की मार है।
एक सप्ताह में बारिश न हुई तो मटर की 50 फीसदी फसल तबाह हो सकती है। किसानों को करोड़ों का नुकसान हो सकता है। गेहूं की फसल भी पीली पड़ चुकी है। किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। - केसी ठाकुर, विशेषज्ञ कृषि विभाग