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हिमाचल चुनाव त्वरित विश्लेषण: मोदी के जादू व जनता के तय रोटेशन से हिमाचल में भगवा

Tue, 19 Dec 2017 07:47 AM IST
राकेश भट्ट, संपादक/ अमर उजाला, शिमला
राकेश भट्ट, संपादक/ अमर उजाला, शिमला Updated Tue, 19 Dec 2017 07:47 AM IST
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himachal election 2017 live result analysis of bjp victory
- फोटो : ANI

हिमाचल विधानसभा चुनाव में पहली बार मोदी का जादू चला है। वैसे पिछले तीन दशकों से भी अधिक समय से जनता बारी-बारी से भाजपा व कांग्रेस को सत्ता देती रही है। जनता के इस रोटेशन के चलते भी भाजपा की ही सरकार बनने की पूरी संभावना पहले ही थी। मंडी व कांगड़ा सहित कांग्रेस के दबदबे वाले कुछ अन्य जिले भी भाजपा ने कांग्रेस से झटक लिए हैं। मोदी फैक्टर के अलावा कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे सुखराम का भाजपा में आना भी उनके काम आया।

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यह परिणाम कांग्रेस को हिमाचल में अपने भविष्य को लेकर भी परेशानी पैदा करने वाले हैं। जनता ने भले ही पुरानी परंपरा को जारी रख देवभूमि में भगवा फहरा दिया है लेकिन भाजपा के मुख्यमंत्री उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल, प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती व स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह सहित कई दिग्गज पीछे चल रहे हैं।
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इस बार की जीत मोदी के जादू की वजह से है यह इस तरह से भी कहा जा सकता है कि पिछले चुनाव में धूमल इसलिए भी कमजोर पड़े क्योंकि वीरभद्र व धूमल के हिमाचल में पार्टी का चेहरा होने केबावजूद केंद्रीय नेतृत्व व केंद्रीय नेताओं का खासा असर यहां के चुनाव पर होता है। वर्ष 2012 के चुनाव में धूमल को कामयाबी नहीं मिली क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरपरस्ती उनके साथ नहीं थी। केंद्र में कांग्रेस का शासन था और जनता के तय किए गए रोटेशन में भी उनका नंबर भी नहीं था।  
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भाजपा के मुख्यमंत्री प्रत्याशी प्रेम कुमार धूमल व पार्टी के पक्ष में पिछले चुनाव में मोदी फैक्टर नहीं था। वर्ष 2012 में भी हिमाचल के साथ ही गुजरात विधानसभा के चुनाव हुए थे लेकिन तब मोदी गुजरात के सीएम उम्मीदवार थे और हैट्रिक मारकर गुजरात में भाजपा की सरकार बनी लेकिन अन्य राज्यों में मोदी लहर नहीं थी। इस बार मोदी फैक्टर हिमाचल के लिए अहम था। 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद मोदी के जादू के चलते भाजपा कई राज्यों को कांग्रेस मुक्त कर चुकी है, इसमें अब हिमाचल भी शामिल हो गया है।

कांग्रेस व उसके मुख्यमंत्री उम्मीदवार 83 वर्षीय वीरभद्र सिंह व भाजपा व उसके मुख्यमंत्री उम्मीदवार उम्मीदवार 73 वर्षीय प्रेम कुमार धूमल को बारी-बारी से सत्ता सौंपने की परंपरा हिमाचल में रही है। जिसके चलते वर्ष 1985 से लेकर अब तक भाजपा व कांग्रेस ने बारी-बारी से सत्ता हासिल की है। 1985 में कांग्रेस की सरकार में वीरभद्र मुख्यमंत्री बने तो वर्ष 1990 में शांता कुमार भाजपा के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद के सभी चुनावों में कांग्रेस के चेहरे वीरभद्र सिंह तो भाजपा के चेहरे प्रेम कुमार धूमल को बारी-बारी से मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलती रही है।


ऐस में यह परिणाम वीरभद्र के भविष्य में चुनाव लड़ने की शंकाओं के बीच कांग्रेस के भविष्य को लेकर भी खतरे की घंटी है। वीरभद्र की जगह कोई बड़ा चेहरा फिलहाल कांग्रेस के पास नहीं है।

- संपादक, अमर उजाला शिमला

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