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महापौर शिमला की पहली नागरिक उनसे ऐसा बर्ताव शर्मनाक: कांग्रेस
Sun, 20 Oct 2019 04:57 PM IST
अरविन्द ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sun, 20 Oct 2019 04:57 PM IST
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कांग्रेस (फाइल फोटो)
- फोटो : Social Media
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जिला प्रशासन की ओर से महापौर कुसुम सदरेट के पुराने कार्यालय पर अचानक कब्जा जमाने के लिए की कार्रवाई को कांग्रेस ने शर्मनाक बताया है। पूछा कि क्या शहर में राष्ट्रपति शासन लग गया है। कांग्रेस का कहना है कि महापौर का उनकी सरकार में कितना सम्मान है, इसका पता जिला प्रशासन की कार्रवाई से चल गया।
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कांग्रेस पार्षद राकेश चौहान, कुसुमलता ठाकुर, दिवाकर देव शर्मा, सिमी नंदा, रीता ठाकुर, रचना भारद्वाज और पूर्व पार्षद नरेंद्र ठाकुर ने कहा कि महापौर के दफ्तर का सामान उनकी ही सरकार के अधिकारियों ने बाहर फेंक दिया। पूछा कि मेयर का जो दफ्तर बंद था, उसका ताला तोड़कर तो प्रशासन ने कब्जा कर लिया। लेकिन डिप्टी मेयर का दफ्तर खुला था, उस पर कोई कार्रवाई नहीं की। अकेले मेयर दफ्तर को निशाना बनाया गया। कहा कि मेयर शहर की पहली नागरिक हैं। उन्हें सांसद के समान समझा जाता है। उनकी गैर मौजूदगी में उनके पुराने दफ्तर से सामान बाहर करना गलत है।
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भाजपा पार्षद खामोश, उठे सवाल
पार्षद राकेश चौहान ने कहा कि जिला प्रशासन और महापौर दोनों ने ही अपने पदों की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने भाजपा पार्षदों पर भी सवाल उठाए। कहा कि मेयर की गाड़ियों में घूमने वाले पार्षद अब जुबान तक नहीं खोल रहे। कहा प्रशासन ने यह कार्रवाई कुसुम सदरेट पर नहीं बल्कि शिमला की मेयर के खिलाफ की है।
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पूर्व मेयर ने भी उठाए सवाल
नगर निगम के पूर्व मेयर एवं माकपा नेता संजय चौहान और पार्षद शैली शर्मा ने भी जिला प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए। कहा कि यह नगर निकायों के अधिकारों पर हमला है। शहर की चुनी हुई सरकार के मुखिया के खिलाफ ऐसी कार्रवाई करने वाले अफसरों पर प्रदेश सरकार कार्रवाई करे। कहा कि भाजपा सरकार टाउनहाल को भी निगम को पूरी तरह दिलाने में नाकाम रही है। अब सरकार के अफसर अपनी निगम सरकार से ऐसा बर्ताव कर रही है।