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हिमाचल: प्राथमिक स्कूलों में कैसे होगी नर्सरी टीचरों की भर्ती, मंत्रिमंडल करेगा तय

Sun, 02 Nov 2025 09:42 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Sun, 02 Nov 2025 09:42 AM IST
सार

प्रदेश में नर्सरी और केजी कक्षाओं के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई) प्रशिक्षकों की भर्ती का भविष्य अब राज्य मंत्रिमंडल तय करेगा।

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Himachal Cabinet to decide how nursery teachers will be recruited in primary schools
शिक्षक(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में नर्सरी और केजी कक्षाओं के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई) प्रशिक्षकों की भर्ती का भविष्य अब राज्य मंत्रिमंडल तय करेगा। शिक्षा विभाग ने इस मुद्दे पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजने की तैयारी कर ली है। सुझाव दिया गया है कि यदि केंद्र सरकार से दो वर्षीय एनटीटी (नर्सरी टीचर ट्रेनिंग) डिप्लोमा की अनिवार्यता में तत्काल छूट नहीं मिलती, तो प्रदेश अपने स्तर पर छह माह का ब्रिज कोर्स शुरू कर सकता है, जिससे पात्रता प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों को अवसर दिया जा सके।

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प्रदेश में नर्सरी टीचर भर्ती के लिए 6,297 पदों पर आवेदन आमंत्रित किए गए थे। कुल 10 हजार से अधिक उम्मीदवारों ने आवेदन जमा करवाए, लेकिन जब योग्यता की जांच हुई तो केवल 14 उम्मीदवार ही मान्यता प्राप्त संस्थान से दो वर्षीय एनटीटी डिप्लोमा धारक पाए गए। शेष सभी आवेदन नियमों के अनुरूप नहीं थे, जिससे पूरी भर्ती प्रक्रिया अधर में लटक गई है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रदेश में फिलहाल बहुत कम ऐसे संस्थान हैं जिन्हें राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) से एनटीटी कोर्स चलाने की मान्यता प्राप्त है।

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अधिकतर आवेदक निजी या बिना मान्यता वाले संस्थानों से डिप्लोमा लेकर आए थे, जिन्हें नियमानुसार स्वीकार नहीं किया जा सकता। इन हालात में राज्य सरकार अब भारत सरकार से यह आग्रह भी कर सकती है कि दो वर्षीय एनटीटी डिप्लोमा की अनिवार्यता में कुछ समय के लिए छूट दी जाए, ताकि प्रदेश में नई नीति बनने तक भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। यदि केंद्र से तत्काल राहत नहीं मिलती, तो सरकार राज्य स्तर पर छह माह का ब्रिज कोर्स शुरू करने पर विचार कर रही है।

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इस कोर्स के जरिए ऐसे उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया जाएगा, जिनके पास स्नातक या शिक्षा में न्यूनतम योग्यता है, ताकि वे ईसीसीई के मानकों के अनुरूप प्रशिक्षित हो सकें। शिक्षा विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर लिया है और आगामी राज्य मंत्रिमंडल बैठक में इसे चर्चा के लिए रखा जा सकता है। मंत्रिमंडल ही यह तय करेगा कि भर्ती प्रक्रिया को किस दिशा में आगे बढ़ाया जाए। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बताया कि हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि एनसीटीई से मान्यता प्राप्त एनटीटी प्रशिक्षक प्रदेश में लगभग नगण्य हैं। इस स्थिति में या तो केंद्र से छूट लेनी होगी या फिर राज्य अपने स्तर पर वैकल्पिक प्रशिक्षण प्रणाली विकसित करेगा।

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