हिमाचल कैबिनेट बैठक: बढ़ाई जा सकती हैं कोरोना बंदिशें, कर्मचारियों के लिए भी बड़े फैसले होने की उम्मीद
हिमाचल प्रदेश कैबिनेट की बैठक मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में पांच जनवरी को शिमला में आयोजित की जाएगी। नए साल की इस पहली कैबिनेट बैठक में कोरोना बंदिशों को बढ़ाने के अलावा कर्मचारियों से संबंधित कई फैसलों पर मुहर लग सकती है।
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हिमाचल प्रदेश कैबिनेट की बैठक पांच जनवरी को बुलाई गई है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में होने वाली नए साल की पहली कैबिनेट बैठक में कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए बंदिशें लगाने पर फैसला हो सकता है। प्रदेश में कोविड-19 की स्थिति पर कैबिनेट बैठक में स्वास्थ्य विभाग प्रस्तुति देगा।इसमें वर्तमान हालात और उससे निपटने के उपाय मंत्रिमंडल के सामने रखे जाएंगे। जिसके बाद प्रदेश में सख्त कदम उठाए जाने पर मंथन के बाद फैसला हो सकता है। चूंकि पड़ोसी राज्यों हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ पहले ही बढ़ते संक्रमण के मामलों को देखते हुए नाइट कर्फ्यू के अलावा 50 फीसदी क्षमता के साथ कार्यालयों का संचालन करने का भी आदेश जारी कर दिया है। ऐसे में अब 31 दिसंबर के बाद प्रदेश में बढ़ रहे कोरोना के मामलों को देखते हुए जयराम सरकार भी बड़ा निर्णय ले सकती है।
कर्मचारियों को लेकर हो सकता है बड़ा फैसला
मंत्रिमंडल की बैठक में कर्मचारियों को देय संशोधित वेतनमान का एरियर और विभिन्न भत्तों के बारे में भी चर्चा हो सकती है। एरियर की कितनी किस्तें दी जानी हैं। इस बारे में स्थिति साफ नहीं है। नए वेतनमान की अधिसूचना जारी हो गई है लेकिन अभी तक एरियर, कर्मचारियों को देय टीए, आवास भत्तों आदि पर निर्णय नहीं हुआ है। इसके अलावा पुरानी पेंशन बहाली के मामले पर भी कैबिनेट में चर्चा हो सकती है। इसके लिए पहले ही कमेटी का गठन किया जा चुका है। वहीं, पुलिस कांस्टेबलों को संशोधित पे बैंड आठ के बजाय दो साल में देने की मांग पर भी कैबिनेट में मुहर लग सकती है। कैबिनेट की बैठक में ऊर्जा नीति को लेकर चर्चा नहीं होगी। ऊर्जा विभाग की ओर से अभी नीति को अंतिम रूप दिया जाना है। आने वाले दिनों में इसको लेकर पॉवर कान्क्लेव करने की योजना है। भारत सरकार से भी ऊर्जा नीति को लेकर सुझाव लिए जा रहे हैं।
बिजली परियोजनाओं को स्थापित करने के लिए भारत सरकार ने भी नियम तय किए हैं। ऐसे में केंद्रीय मंजूरी लेना भी जरूरी है। वहीं, प्रदेश के हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों को रेगुलर करने का मामला कैबिनेट बैठक में जा सकता है। प्रदेश में 20 हजार से अधिक आउटसोर्स कर्मचारी सरकारी विभागों में सेवाएं दे रहे हैं। सरकार विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं ले रही है। आउटसोर्स कर्मचारी लंबे समय से ठोस नीति बनाने की मांग सरकार से उठाते रहे हैं। इन कर्मचारियों के मसले को कैबिनेट सब कमेटी के पास विचार करने के लिए भेजा गया था। यह कमेटी आउट सोर्स कर्मचारियों की पक्षधर बताई जा रही है। माना जा रहा है कि आउटसोर्स कर्मचारियों के मामले को कैबिनेट की बैठक में शीघ्र लाया जाना है।
नई खेल नीति
प्रदेश को 20 साल बाद बुधवार को नई खेल नीति मिलेगी। बुधवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में इसे मंजूरी दी जानी है। केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर को इस नीति की घोषणा करनी थी लेकिन यह कवायद सिरे नहीं चढ़ी। कैबिनेट बैठक में खेल महाकुंभ को लेकर भी प्रस्तुति दी जाएगी। प्रदेश के युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री राकेश पठानिया ने बीते माह सचिवालय से एलान किया था कि नई खेल नीति 11 दिसंबर को धर्मशाला में घोषित होगी। अनुराग ठाकुर नई खेल नीति का शुभारंभ करेंगे। इस दौरान कैबिनेट बैठक नहीं होने के चलते मामला लटक गया था। बीते दिनों हुई कैबिनेट बैठक में इसको लेकर चर्चा हुई लेकिन ओलंपिक संघ ने इसके लिए सुझाव देने का समय मांगा था। अब ऊना में कुछ दिन पहले ओलंपिक संघ के साथ खेल विभाग की बैठक हो चुकी है। संघ के सुझाव भी नीति में शामिल किए गए हैं। ऐसे में संभावित है कि बुधवार को होने वाली बैठक में प्रदेश की नई खेल नीति को मंजूरी मिल जाएगी। उल्लेखनीय है कि साल 2001 में प्रदेश की खेल नीति बनाई गई थी। बीते कई वर्षों से नई नीति बनाने के प्रयास जारी रहे। एक जनवरी 2020 को युवा सेवाएं एवं खेल विभाग ने नई खेल नीति के ड्राफ्ट को अधिसूचित किया था। बीते दो साल से फाइलों में घूम रही नई खेल नीति अब लागू की जानी है।